जम्मू-कश्मीर को विशेष अधिकार देने वाले संविधान के अनुच्छेद-35ए पर सियासी माहौल गर्म होता जा रहा है. समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक शनिवार को अलगाववादियों द्वारा बंद की अपील पर कश्मीर घाटी और जम्मू के कुछ हिस्सों में जनजीवन पूरी तरह ठप हो गया. यह अपील सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुक और मोहम्मद यासीन मलिक की अध्यक्षता वाले संयुक्त मोर्चे ने की थी.

अनुच्छेद-35ए से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट में इसे चुनौती देने वाली याचिका आने के बाद सामने आया है. इसमें राष्ट्रपति के आदेश से 1954 में संविधान में शामिल इस प्रावधान को हटाने की मांग की गई है. यह प्रावधान राज्य की विधानसभा को अपने यहां के स्थायी नागरिकों की परिभाषा तय करने का अधिकार देता है. इससे दूसरे राज्यों के लोग वर्षों तक रहने के बावजूद यहां के नागरिक नहीं बन सकते.

इसको हटाए जाने की आशंका पर जम्मू-कश्मीर के सभी राजनीतिक दलों की तीखी प्रतिक्रिया आई है. शुक्रवार को इसी मुद्दे पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और राज्य के लोगों की चिंता बताई. प्रधानमंत्री से सकारात्मक आश्वासन मिलने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा था कि अनुच्छेद-370 से कोई समझौता न करना ही राज्य में भाजपा के साथ गठबंधन का एजेंडा है. उधर, भाजपा के महासचिव राम माधव ने अनुच्छेद-35ए को राजनीतिक मुद्दा बनाने का विरोध किया है. शनिवार को उन्होंने कहा, ‘अनुच्छेद-35ए का मामला सुप्रीम कोर्ट में है. हमें इसका कानूनी समाधान निकालने की जरूरत है.’