इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी ने आखिरकार क्रिकेट प्रशासन से अपना नाता तोड़ लिया है. डेक्कन हेराल्ड के अनुसार शनिवार को उन्होंने नागौर जिला क्रिकेट संघ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. राजस्थान क्रिकेट संघ (आरसीए) और बीसीसीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राहुल जौहरी को भेजे इस्तीफे में ललित मोदी ने लिखा है, ‘अब अगली पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है, इसलिए आज और अभी से क्रिकेट प्रशासन को अलविदा कहना चाहता हूं.’

ललित मोदी मनी लॉन्डरिंग के मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं. अभी वे लंदन में हैं और उनके प्रत्यर्पण की कोशिशें जारी हैं. ललित मोदी को 2008 में आईपीएल को खड़ा करना का श्रेय दिया जाता है. लेकिन, वित्तीय हेराफेरी के आरोप लगने पर बीसीसीआई ने 2010 में उन्हें निकाल दिया था. इसके अलावा आरसीए में अपना पद न छोड़ने की वजह से बीसीसीआई ने उस पर भी प्रतिबंध लगा दिया था.

हालांकि, ललित मोदी ने अब बीसीसीआई से आरसीए का बकाया पैसा देने का अनुरोध किया है. अपने इस्तीफे में उन्होंने लिखा है, ‘मेरा मानना है कि मेरी वजह से आरसीए का फंड रोका गया था. सभी तरह के और सभी स्तरों के क्रिकेट से हमेशा के लिए अलग होने के बाद मैं सोचता हूं कि आरसीए को अपना बकाया हिस्सा मांगने और भारत के क्रिकेट मानचित्र पर उभरने का हक है.’

ललित मोदी बीते सात सालों से देश से फरार होने के बावजूद आरसीए पर नियंत्रण बनाए हुए थे. हालांकि, इसी साल जून में उन्हें एक बड़ा झटका लगा था. आरसीए के चुनाव में उनके बेटे रुचिर मोदी को कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सीपी जोशी से मात खानी पड़ी थी. इसके बाद क्रिकेट प्रशासन में ललित मोदी का वर्चस्व टूटने की चर्चा शुरू हो गई थी.