केन्या में उहरू केन्याता के शुक्रवार को दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद हिंसा भड़क गई है. हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने गोलियां चलाईं जिसमें कम से कम 11 लोग मारे गए. विपक्षी दलोंं का आरोप है कि केन्याता ने चुनाव में धांधली करवाई, इसलिए वे इसके परिणाम को स्वीकार नहीं करेंगे. इसके परिणाम के विरोध में तमाम विपक्षी पार्टियां एकजुट होकर प्रदर्शन कर रही हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार देश के कई हिस्सों में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं.

वहां के चुनाव आयोग के अनुसार केन्याता को 54 फीसदी जबकि विपक्षी उम्मीदवार रायला ओडिंगा को 44 फीसदी वोट मिले थे. लेकिन ओडिंगा ने अपनी हार मानने से इनकार कर दिया और कहा कि चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है. वे केन्या के दिग्गज राजनेता माने जाते हैं और इस बार राष्ट्रपति के लिए आखिरी चुनाव लड़ रहे थे. सबसे अधिक हिंसा ओडिंगा का गढ़ कहे जाने वाले पश्चिमी शहर किसुमु में हुई. वहां गोलीबारी के साथ आगजनी की घटनाएं हुई हैं. विरोधियों ने राजधानी नैरोबी की झुग्गियों पर भी अपना गुस्सा निकाला, जिसे रोकने के लिए पुलिस को आंसू गैस के साथ गोलियां चलानी पड़ी.

पूर्वी अफ्रीका के इस देश में चुनावी हिंसा का लंबा इतिहास रहा है. 10 साल पहले 2007 में भी मतदान के विरोध में भारी हिंसा हुई थी. उस समय अकेले किसुमु में 1,200 से ज्यादा लोग मारे गए थे. जानकारों का दावा है कि तब छह लाख से अधिक लोगों को​ हिंसा के चलते अपना घर छोड़ना पड़ा था.