यूं तो इंस्टेंट मेसेजिंग अप्लिकेशन के कई सारे विकल्प आज इंटरनेट पर मौजूद हैं. लेकिन सोशल मीडिया को बीच-बीच में ईमानदार फीडबैक देने का बुखार चढ़ता रहता है. इसलिए यहां पर अक्सर ऐसे ऐप दिख जाते हैं जिनके जरिये यूजर्स को बिना अपनी पहचान बताए सामने वाले के बारे में अपनी राय देने का मौका मिल जाता है. यिक-यॉक, सेऐट डॉट मी, सीक्रेट, आस्क डॉट एफएम इसके उदाहरण हैं, इन्हें ऑनेस्टी ऐप का नाम दिया गया है. हाल-फिलहाल सबसे ज्यादा चर्चा बटोर सराहा भी ऐसा ही एक ऐप है. यह विशेष इस मायने में है कि इसके जितनी लोकप्रियता पहले किसी ऐप ने नहीं बटोरी थी. इसकी वजह यह हो सकती है कि बाकी एप किसी एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बनाए गए थे. वहीं सराहा फेसबुक, ट्विटर, स्नैपचैट, इंस्टाग्राम हर जगह पहुंच चुका है.

सऊदी अरब के मूल निवासी ज़ैन अल अब्दीन तौफ़ीक़ द्वारा बनाया गया यह ऐप मूलतः एक वेबसाइट थी जो इसी साल फरवरी में लॉन्च की गई थी. इसका उद्देश्य था कंपनी में अपनी पहचान छुपाकर बॉस का फीडबैक देना. शुरुआती हफ्ते में ही इस पर करीब दो करोड़ से ज्यादा व्यूज आ चुके थे. इसलिए तौफ़ीक़ को लगा कि इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है, लिहाजा जून तक उन्होंने सराहा का ऐप भी बनाकर तैयार कर दिया. यह इतना लोकप्रिय हुआ कि जुलाई आते-आते 30 से ज्यादा देशों में यह ऐपल के ऐप स्टोर से सबसे ज्यादा डाउनलोड किए जाने वाले ऐप्स में टॉप पर था. बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में इसके करीब 30 करोड़ यूजर्स हैं. भारत में भी इससे जुड़ने वाले ग्राहकों की संख्या दो महीने के अंदर ही बहत्तर लाख से ऊपर चली गयी है.

ये काम कैसे करता है

इसकी वेबसाइट सराहा.कॉम (sarahah.com) पर जाकर अपने आप को रजिस्टर किया जा सकता हैं या फिर एंड्राइड और ऐपल पर इसके ऐप को डाउनलोड किया जा सकता है. इसके बाद आप अपने दोस्तों के साथ फेसबुक, स्नेपचैट आदि पर इसका लिंक शेयर करके अपने बारे में उनकी राय आमंत्रित कर सकते हैं. वे इस लिंक पर क्लिक आपके अकाउंट पर मनचाहा संदेश भेज सकते हैं लेकिन संदेश भेजने वाले की पहचान गुप्त रखी जाती है. इस ऐप के साथ सबसे बड़ी सुविधा और कमी दोनों यही हैं कि फीडबैक लेने के लिए तो आपको अकाउंट बनाने की जरूरत है लेकिन देने के लिए नहीं. हालांकि फीडबैक देने वाला यूजर अगर चाहे तो लॉगइन कर सकता है मगर फीडबैक भेजते हुए डिफॉल्ट सेटिंग में उसकी पहचान नहीं दिखेगी. यूजर खुद चाहे तो मैसेज भेजते समय अपनी पहचान उजागर सकता है. लेकिन अगर नाम छुपाने की सुविधा है तो कितने लोग ऐसा करना चाहेंगे भला!

सराहा की एक खासियत यह भी है कि इसके किसी यूजर को भेजे गए फीडबैक किसी दूसरे यूजर को नहीं दिखाई देते. और पढ़ने वाला भी भेजने वाले को कोई जवाब नहीं दे सकता है. सराहा की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे जवाब देने का विकल्प देने पर विचार कर रहे हैं. इसके अलावा अगर कोई यूजर किसी एक ही व्यक्ति को लगातार फीडबैक भेजते रहना चाहता है तो वह उसे फॉलो कर सकता है. लेकिन यहां भी जिसे फॉलो किया जा रहा है, उसे इसका पता नहीं चलता है.

इसके परिणाम

जहां एक तरफ लोग इसके इस्तेमाल पर हल्का-फुल्का आनंद ले रहे हैं वही कुछ लोग इससे चिंतित भी होने लग गए हैं. इनका मानना है कि ये वेबसाइट या ऐप इंटरनेट के उस मूल सिद्धांत के ही ख़िलाफ़ है जिसके तहत संवाद के वक्त अपनी पहचान जाहिर करना एक अनिवार्य शर्त होती है. सराहा के मामले में आपसे कोई कुछ भी अनाप-शनाप कह सकता है लेकिन आप उसका कुछ नहीं कर सकते. इसके चलते लोग अपनी पहचान छुपाये रख कर निस्संकोच अपनी राजनीतिक और धार्मिक सोच दूसरों पर डालने के प्रयास कर सकते हैं. यहां पर किसी खास वर्ग के लोगों को निशाना बनाना आसान हो जाता है. सराहा को लेकर लड़कियों के अनुभव भी बहुत अच्छे नहीं कहे जा सकते हैं. कुल मिलाकर कहा जाए तो सोशल मीडिया ट्रोल्स के लिए सराहा एक बेहद शानदार मौके की तरह आया है.

सराहा एक अरबी शब्द है जिसका मतलब है ‘ईमानदारी’. गूगल प्ले स्टोर पर इसका परिचय भी अनजान लोगों से ईमानदार राय पाने का जरिया बताते हुए दिया गया है. अगर मान लें कि इसका उद्देश्य ‘ऑनेस्ट एंड कंस्ट्रक्टिव फीडबैक’ पाना ही है तो भी इसके तौर-तरीके कुछ भी आपके नियंंत्रण में नहीं रहने देते हैं. इसलिए सलाह यह है कि दिमागी शांति चाहने वालों के लिए सराहा नहीं है.