कल अंतरराष्ट्रीय दिव्यांग दिवस था. 27 दिसंबर, 2015 को प्रसारित मन की बात में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से विकलांग की जगह दिव्यांग शब्द इस्तेमाल करने की अपील की थी. उनका कहना था, ‘ऐसे लोगों के लिए दुनिया में अनेक-अनेक शब्द प्रयोग हुए हैं, लेकिन हमेशा इन शब्दों के प्रति भी चिंतन चलता रहा है. हर समय लोगों को लगा कि नहीं...नहीं...नहीं... ये शब्द उनके पहचान के लिए अच्छा नहीं लगता है. सम्मानजनक नहीं लगता है.’ प्रधानमंत्री का आगे कहना था, ‘मेरे मन में विचार आया कि हम हमारे देश में विकलांग शब्द की जगह दिव्यांग शब्द का इस्तेमाल करें. मुझे यह शब्द बहुत अच्छा लग रहा है. क्या मेरे देशवासी हम आदतन विकलांग की जगह पर दिव्यांग शब्द को प्रचलित कर सकते हैं क्या? मैं आशा करता हूं कि इस बात को आप आगे बढ़ाएंगे.’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील का मीडिया संस्थानों सहित आम लोगों पर भी असर दिखने को मिला और वे विकलांग की जगह दिव्यांग शब्द का इस्तेमाल करते हुए दिखाई दिए. दूसरी ओर, प्रधानमंत्री की अपील के करीब दो साल बाद भी सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय और पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) सहित अन्य सरकारी संस्थान अपनी वेबसाइट पर विकलांग शब्द का ही इस्तेमाल कर रहे हैं.
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय
पत्र सूचना कार्यालय
सुगम्य भारत अभियान की वेबसाइट
भारत का राष्ट्रीय पोर्टल

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