आय से अधिक संपत्ति मामले में दोषी करार दी गई अन्नाद्रमुक नेता वीके शशिकला और दो अन्य की समीक्षा याचिका सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ठुकरा दी. जस्टिस एसए बोबड़े और अमिताभ रॉय की खंडपीठ ने कहा कि उन्हें तथ्यों में कोई गड़बड़ी नहीं दिखती लिहाजा ये याचिकाएं खारिज की जाती हैं. शीर्ष अदालत ने इस साल 14 फरवरी को शशिकला, उनकी रिश्तेदार इलावरासी ​और ​तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जय​ललिता के दत्तक पुत्र वीएन सुधाकरन को चार-चार साल की जेल की सजा सुनाई थी. अदालत के इस फैसले के चलते ही शशिकला तमिलनाडु की मुख्यमंत्री नहीं बन सकी थीं.

मई में दायर समीक्षा याचिकाओं में कहा गया था कि राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की मौत के चलते उनके खिलाफ मुकदमा खत्म हो गया था. याचिकाओं में मांग की गई थी कि मुख्य आरोपित पर से मामला हटने के चलते उन पर से भी मामले खत्म कर दिए जाएं. ऐसे में उन्होंने कर्नाटक हाई कोर्ट के उन्हें बरी करने के फैसले को बहाल करने की मांग की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी इन दलीलों को मानने से इनकार कर दिया.

इससे पहले बेंगलुरु के ट्रायल कोर्ट ने 54 करोड़ रुपये के इस घोटाले में जयललिता और शशिकला समेत दो अन्य आरोपितों को गुनहगार माना था. अदालत ने सभी को चार-चार साल की सजा सुनाई थी. साथ ही, जयललिता को 100 करोड़ रुपये और बाकी दोषियों को 10-10 करोड़ रुपये का आर्थिक दंड दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उसी फैसले को बरकरार रखा था. इससे शशिकला विधायक और अंतत: मुख्यमंत्री बनने के अयोग्य हो गईं. इस तरह जयललिता के बाद तमिलनाडु का राजनीतिक नेतृत्व संभालने का उनका सपना अधूरा रह गया.