केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दख़लंदाज़ी के आरोप पहले से लग रहे हैं. अब उसके नए कदम से इन आरोपों को थोड़ा और मज़बूत आधार मिलता नज़र आ रहा है. ख़बरों के मुताबिक मोदी सरकार ने अखिल भारतीय सेवाओं (भारतीय प्रशासनिक सेवा, भारतीय पुलिस सेवा और भारतीय वन सेवा) के अफसरों के कैडर अावंटन की नई नीति तैयार की है. इसके बाद नए अफसर किसी राज्य का कैडर नहीं चुन सकेंगे.

लाइव मिंट में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक अखिल भारतीय सेवाओं के अफसरों के कैडर का ‘राष्ट्रीय स्तर पर एकीकरण’ किया जा रहा है. इसके तहत पूरे देश को पांच क्षेत्रीय (ज़ोन) कैडरों में बांटे जाने की तैयारी है. इन अफसरों को किसी राज्य के बजाय इन्हीं क्षेत्रीय कैडरों में से किसी का चुनाव करना होगा. जबकि अब तक मौज़ूदा 26 राज्यवार कैडरों में से उन्हें किसी का भी चुनाव करने की सुविधा दी जाती है. सूत्र की मानें तो नई नीति को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी मिलते ही उसे इसी साल से लागू किया जा सकता है.

सूत्र बताते हैं कि नई नीति के तहत पहले कैडर ज़ाेन में अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिज़ोरम और केंद्रशासित प्रदेशों के साथ ही जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान और हरियाणा को रखा जा रहा है. दूसरे ज़ोन में- उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और ओडिशा. तीसरे में- गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़. चौथे में- असम, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, मेघालय, मणिपुर, त्रिपुरा और नगालैंड तथा पांचवें में- तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु व केरल को शामिल किए जाने का प्रस्ताव है.

एक शीर्ष अधिकारी बताते हैं, ‘नई नीति का मक़सद ये है कि अखिल भारतीय सेवा के अफसरों के भीतर ‘अखिल भारतीय सेवा’ की ही भावना और सोच विकसित हो. वे उन राज्यों में काम करने के लिए भी तैयार हों जहां उनका मूल निवास नहीं है. ख़ुद के लिए पूरी तरह अनजान राज्य में अगर वे काम करेंगे तो उन्हें नए अनुभव हासिल होंगे. यह स्थिति उनके लिए लाभदायक ही होगी.’ हालांकि इस नीति में लाभ केंद्र सरकार का भी है कयोंकि क्षेत्रीय कैडर की व्यवस्था लागू होते ही ये अफसर राज्य सरकारों के प्रति ज़वाबदेही और उनके दबाव से मुक्त हो सकते हैं.