नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने रोजगार के अवसरों में कमी के लिए भारतीय उद्यमियों के रवैए को बड़ी बाधा बताया है. समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक उन्होंने कहा है, ‘रोजगार सृजन में सबसे बड़ी बाधा यह है कि हमारे उद्यमी श्रमिकों की ज्यादा जरूरत वाले क्षेत्रों में निवेश ही नहीं कर रहे हैं.’ गुरुवार को नीति आयोग की ‘तीन वर्षीय कार्य योजना 2017-20’ को जारी करते हुए अरविंद पनगढ़िया ने कहा, ‘श्रमिकों की सघनता वाले क्षेत्रों में निवेश करने वाला कोई नहीं है.’ उन्होंने इस आरोप को भी खारिज किया है कि सख्त श्रम कानून भारत के औद्योगिक विकास में बाधा बन रहे हैं.

गुजरात का उदाहरण देते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि वहां श्रम कानून काफी प्रगतिशील हैं, फिर भी रोजगार सृजन में कोई उल्लेखनीय बदलाव दिखाई नहीं दिया है. वहीं इस कार्यक्रम में मौजूद श्रम सचिव एम सत्यवती ने कहा, ‘श्रम समवर्ती सूची का विषय है. राज्य धीरे-धीरे श्रम कानूनों को उदार बना रहे हैं. लेकिन हम नहीं समझ पा रहे कि श्रम कानूनों में सुधार को लेकर उद्यमी केंद्र से क्या चाहते हैं, ताकि वे श्रमिकों की अधिकता वाले क्षेत्रों में निवेश कर सकें.’

नीति आयोग की ‘तीन वर्षीय कार्य योजना 2017-20’ के तहत 2019-20 तक शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, ग्रामीण विकास, रक्षा, रेलवे और सड़कों पर सार्वजनिक खर्च बढ़ाने का प्रस्ताव किया है. इसमें यह भी कहा गया है कि भारत अगले दो-तीन साल में आठ फीसदी विकास दर का लक्ष्य हासिल कर सकता है.