बिहार की जद-यू (जनता दल-यूनाइटेड) की तरह तमिलनाडु की सत्ताधारी पार्टी एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) में भी वर्चस्व की लड़ाई निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है. यहां बीते दिसंबर में पार्टी की अंतरिम महासचिव बनाई गई शशिकला नटराजन के ख़िलाफ अब तक मुख्यमंत्री ईके पलानिसामी (ईपीएस) कार्रवाई करने से हिचक रहे थे. लेकिन सोमवार को उन्होंने निर्णायक कदम उठा ही लिया. उनकी अध्यक्षता में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की बैठक में शशिकला को एआईएडीएमके से निष्कासित करने का संकल्प पारित कर दिया गया.

हालांकि पार्टी संविधान के मुताबिक सिर्फ संकल्प पारित कर महासचिव को उनके पद से नहीं हटाया जा सकता. इसके लिए पार्टी की साधारण सभा की बैठक बुलानी होगी. लिहाज़ा इस बाबत भी फैसला किया गया है कि जल्द ही (संभवत: एक सप्ताह के भीतर) साधारण सभा की बैठक बुलाई जाएगी. इसमें शशिकला को पार्टी से निष्कासित किए जाने संबंधी संकल्प पर मोहर लगाई जाएगी.

यही नहीं शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन की बताैर उपमहासचिव नियुक्ति को पहले ही पार्टी संविधान के ख़िलाफ बताए जाने के बाद अब उन्हें भी पार्टी से निष्कासित किए जाने का फैसला हुआ है. साथ ही शशिकला और दिनाकरन की ओर से की गई सभी नियुक्तियों को भी रद्द कर दिया गया है. इसके अलावा यह भी तय किया गया कि ‘नामातू एमजीआर’ पत्रिका और जया टीवी का मालिकाना हक भी अब पार्टी संभालेगी, जो कि इससे पहले पार्टी की पूर्व महासचिव जे जयललिता के पास हुआ करता था.

यहां याद दिलाते चलें कि इसी शनिवार को दिनाकरन ने मुख्ययमंत्री पलानिसामी के सामने सीधी चुनौती पेश की थी. उन्होंने ईपीएस की बग़ावत के मद्देनज़र उन्हें सलेम (ग्रामीण) जिला इकाई के सचिव पद से हटा दिया था. उनकी जगह अपने समर्थक विधायक एके सेल्वम को इस पद पर नियुक्त किया था. इसके अलावा दिनाकरन ने विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक एस राजेंद्रन को भी अरियालूर जिला इकाई के सचिव पद से हटा दिया था. राजेंद्रन पर यह कार्रवाई उनकी ओर से विधानसभा अध्यक्ष पी धनपाल को लिखे पत्र के बाद की गई थी. इस पत्र में उन्होंने दिनाकरन का समर्थन करने वाले विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की थी. दिनाकरन के पास इस वक़्त 21 विधायकाें का समर्थन है. इन सभी को पुड्‌डुचेरी के एक रिज़ॉर्ट में रखा गया है.