हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले अंदरूनी टकराव के चलते कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती जा रही है. मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के बीच जारी टकराव में नया मोड़ आ गया है. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू को हटाने की मांग कर रहे मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने विधानसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी है.

उधर, प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू के खेमे ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह दबाव बनाने की रणनीति का इस्तेमाल कर रहे हैं. हिमाचल प्रदेश में छह बार से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) की बैठक के दौरान चुनाव न लड़ने और पार्टी का नेतृत्व न करने की घोषणा की है. उनकी घोषणा से चिंतित सीएलपी के विधायकों ने प्रस्ताव पारित कर पार्टी हाई कमान से इसमें जल्द से जल्द दखल देने की अपील की है. इसके मुताबिक ज्यादातर विधायकों का कहना है कि अगर वीरभद्र सिंह चुनाव नहीं लड़े तो वे भी चुनाव नहीं लड़ेंगे.

रिपोर्ट के मुताबिक सीएलपी ने अपने प्रस्ताव में वीरभद्र सिंह को राज्य का सबसे कद्दावर और स्वीकार्य नेता बताया है. इसके अलावा आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत दिलाने में उनकी भूमिका को काफी अहम बताया है. सीएलपी प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि वीरभद्र सिंह के बगैर राज्य में पार्टी की जीत की उम्मीद करना असंभव है.