भारत और चीन के बीच सिक्किम से लगते और भूटान के अधिकार क्षेत्र वाले डोकलाम पठार पर विवाद ख़त्म हो चुका है. यह घोषणा दोनों देशों की ओर से अधिकृ़त तौर पर हो चुकी है. लेकिन घोषणा के एक दिन बाद ही इसी मसले से जुड़ी दो ऐसी ख़बरें आई हैं जो बताती हैं कि मसला पूरी तरह हल नहीं हुआ है.

द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक डोकलाम का विवाद मूल रूप से भूटान और चीन के बीच उलझा हुआ है. और चूंकि भूटान को उसकी सीमाओं की सुरक्षा का भरोसा भारत की ओर से मिला हुआ है इसलिए भारतीय पक्ष भी इसमें शामिल हो गया था. इसके चलते दोनों देशों के बीच क़रीब 70 दिन से ज़्यादा गतिरोध की स्थिति बनी रही. फिर अब कहीं जाकर दोनों सेनाओं के एक साथ पीछे हटने पर सहमति बनी.

लेकिन जैसा कि ख़बर में बताया गया है भूटान और चीन के बीच डोकलाम विवाद सुलझने के अासार जल्द नजर नहीं आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक स्थायी समाधान के लिए भूटान की रॉयल आर्मी और चीन की पीएलए (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी) के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होती रहती है. अमूमन जून और अगस्त में. लेकिन इस बार चीन ने भूटान को ऐसे संकेत नहीं दिए हैं कि वह सीमा विवाद पर बातचीत का इच्छुक है.

भूटान के विशेषज्ञों के मुताबिक डोकलाम पर चीन काफी सालों से अपना दावा ज़ताता रहा है. लेकिन चूंकि डोकलाम इस बार पूरी दुनिया की नज़र में है. इसीलिए चीन अभी इस पर बातचीत के लिए राज़ी हुआ तो डोकलाम पर उसका दावा झूठा साबित होगा और यह तथ्य स्थापित होगा कि यह असल में विवादित क्षेत्र है. यहीं वज़ह है कि इस बार वह इस पर बातचीत से पीछे से हटता हुआ दिखाई दे रहा है.

दूसरी तरफ बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक चीन ने अभी यह आश्वासन भी नहीं दिया है कि वह डोकलाम में सड़क निर्माण नहीं करेगा. जबकि यही भारत के साथ उसके विवाद की जड़ है. चीन अपने महात्वकांक्षी ओबीओआर (वन बेल्ट वन रोड) परियोजना के तहत यहां से ऐसी सड़क निकाल रहा है जिस पर आसानी से मोटरगाड़ियां दौड़ सकें. लेकिन यह भारत की सामरिक सुरक्षा के लिए ख़तरनाक माना जा रहा है.

इसके बावज़ूद सड़क निर्माण से पीछे हटने के लिए चीन तैयार नहीं दिखता. चीनी विदेश विभाग की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने कहा है, ‘हम इस मसले (डोकलाम में सड़क निर्माण) पर कई अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए फैसला करेंगे. इनमें मौसम की स्थिति, ज़मीनी हालात आदि शामिल हैं.’ साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सीमा सुरक्षा की अपनी ज़रूरतों के मद्देनज़र चीन के सैनिक डोकलाम में आगे भी गश्त करते रहेंगे.’

यानी कुल मिलाकर स्थिति यह है कि अपने साझा कारोबारी, सामरिक और राष्ट्रीय हितों को देखते हुए भारत और चीन ने डोकलाम का मसला अभी तो ठंडे बस्ते में डाल दिया है. लेकिन इस विवाद के फिर उभरने की आशंका से पूरी तरह इंकार नहीं किया जा सकता. ख़ास तौर पर चीन के रवैये को देखते हुए.