उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ के साथ दोनों उपमुख्यमंत्रियों - केशव प्रसाद मौर्या और दिनेश शर्मा ने मंगलवार को लखनऊ में विधान परिषद चुनाव के लिए अपना पर्चा दाखिल किया है. मुख्यमंत्री आदित्यनाथ अभी गोरखपुर से लोकसभा सांसद है. फिलहाल वे और दोनों उपमुख्यमंत्री विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. इनके साथ सरकार में दो अन्य मंत्रियों मोहसिन रजा और स्वतंत्र देव सिंह ने भी प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र नाथ पाण्डेय की मौजूदगी में पर्चा भरा. चुनाव आयोग के मुताबिक विधान परिषद की पांच सीटों के लिए 15 सितंबर को मतदान होना है. इसके नतीजे भी उसी दिन घोषित किए जाएंगे.

आदित्यनाथ ने 19 मार्च, 2017 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. संवैधानिक प्रावधानों के मुताबिक राज्य में मंत्री बनने के छह महीने के भीतर विधानमंडल का सदस्य बनना अनिवार्य होता है. मुख्यमंत्री आदित्यनाथ सहित अन्य मंत्रियों के लिए यह समयसीमा 19 सितंबर को खत्म हो रही है. इससे पहले 2007 में बसपा सुप्रीमो मायावती और 2012 में अखिलेश यादव ने भी जनता द्वारा सीधे चुने जाने की जगह विधान परिषद का ही रास्ता चुना था. भारतीय संविधान के मुताबिक विधान परिषद राज्य विधानमंडल का ऊपरी सदन होती है. उत्तर प्रदेश में विधान परिषद सदस्यों की कुल संख्या 100 है. इनमें से 10 सदस्य राज्यपाल द्वारा मनोनीत किए जाते हैं.