प्रतीकों की राजनीति का एक और उदाहरण. ख़बर है कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार नेहरू युवा केंद्र संगठन (एनवाईकेएस) से ‘नेहरू’ को ही बेदखल करने की तैयारी कर रही है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक जल्द ही इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की मोहर लग सकती है.

सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय खेल एवं युवक कल्याण मंत्रालय ने एनवाईकेएस का नाम बदलने का प्रस्ताव तैयार किया है. इसके तहत अब इसे राष्ट्रीय युवा केंद्र संगठन कहा जाएगा. यह प्रस्ताव जल्दी केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंज़ूरी के लिए भेजा जाने वाला है. नाम परिवर्तन की कवायद में लगे लोगों के इस बाबत अपने तर्क भी हैं. मसलन- एक ये कि संगठन देश के 623 जिलों तक अपनी पहुंच बनाते हुए सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय दर्ज़ा हासिल कर चुका है. दूसरी बात- संगठन की गतिविधियों के ज़रिए केंद्र सरकार के ‘स्वच्छ भारत’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘नमामि गंगे’ जैसी परियोजनाओं का प्रचार-प्रसार भी किया जाता है. और तीसरा- नाम बदलने के बावज़ूद बीते तीन दशक की मेहनत से तैयार किए गए संगठन के ब्रांडनेम ‘एनवाईकेएस’ पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा. यह जस का तस रहेगा.

एनवाईकेएस के प्रशासक मंडल (बोर्ड ऑफ गवर्नर्स) के एक सदस्य अख़बार से बातचीत में इसकी पुष्टि करते हैं. वे कहते हैं, ‘हां, एनवाईकेएस से नेहरू का नाम हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा तो हुई है. लेकिन अभी इसे सरकार की मंज़ूरी नहीं मिली है.’ वैसे सूत्रों की मानें तो यह कवायद उसी समय से शुरू हो गई थी जब मई 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी. उस वक़्त आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) से जुडे कुछ लोगों को एनवाईकेएस के बोर्ड में बतौर उपाध्यक्ष शामिल किया गया था. उन्हीं ने पहली बार नाम परिवर्तन का प्रस्ताव पेश किया था.

ग़ौरतलब है कि नेहरू युवा केंद्र की योजना सबसे पहले 1972 में शुरू हुई थी. इसका मकसद विभिन्न गतिविधियों के ज़रिए ग्रामीण ‘अशिक्षित युवाओं का व्यक्तित्व विकास’ करना था. आगे चलकर 1987 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल में एक स्वायत्तशासी संगठन ‘एनवाईकेएस’ बनाकर यह योजना उसके हवाले कर दी गई. उस वक़्त देशभर के 42 जिलों में एक साथ एनवाईकेएस की शुरुआत की गई थी. जल्द ही इसका विस्तार 311 जिलों में हो गया. और अब लगभग पूरे देश में इसकी पहुंच है. साथ ही इसकी गतिविधियों में अब शहरी और शिक्षित युवा भी बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं. यही तथ्य इसके नाम परिवर्तन का आधार बन रहा है.