शायद चीन के दबाव में ही सही पर पाकिस्तान ने पहली बार माना है कि लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) जैसे आतंकी संगठन उसी की जमीन पर जमे हुए हैं. वहीं से वे अपनी आतंकी गतिविधियां भी संचालित कर रहे हैं. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक पाकिस्तान के विदेश मंत्री ख़्वाजा मुहम्मद आसिफ ने इन संगठनों के ख़िलाफ सख़्त कार्रवाई किए जाने की ज़रूरत भी बताई है.

ख्वाजा आसिफ ने पाकिस्तान के समाचार चैनल जियो न्यूज़ से बातचीत में कहा, ‘हमें एलईटी और जेईएम जैसे तत्वों की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने होंगे ताकि दुनिया को यह बताया जा सके हम अपना घर दुरुस्त रख सकते हैं. मैं कोई राजनीतिक बयान नहीं दे रहा हूं. लेकिन हम ऐसे संगठनों की तरफ आंख मूंदकर नहीं बैठ सकते. अगर हम ऐसा करते हैं तो हमें बार-बार विश्व मंच पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ेगा.’

चीन में हुए ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) सम्मेलन के दौरान जारी संयुक्त घोषणा पत्र में एलईटी-जेईएम का नाम शामिल किए जाने पर आसिफ अपनी राय दे रहे थे. इस घटनाक्रम को भारत की कूटनीतिक उपलब्धि और पाकिस्तान तथा चीन के लिए शर्मिंदगी माना गया था. इस पर आसिफ ने कहा, ‘हम ज़्यादा लंबे समय तक यह बर्दश्त नहीं कर सकते कि आतंकवाद के मसले पर चीन जैसे हमारे मित्रों को हर बार कसौटी पर खड़ा किया जाए.’

वैसे एक दिन पहले ही पाकिस्तान के विदेश विभाग और रक्षा मंत्री खुर्रम दस्तगीर ने ब्रिक्स घोषणा पत्र के इस बिंदु को खारिज़ कर दिया था कि पाकिस्तानी मिट्‌टी आतंकी संगठनों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनी हुई है. इसीलिए एक दिन के भीतर ही उसके नज़रिए में बदलाव को चीन के दबाव का असर माना जा रहा है. यहां तक कि आसिफ ने पाकिस्तान की अफग़ान नीति को भी गलत बता दिया है. उन्होंने कहा, ‘हमने पिछले सालों में कई गलतियां कीं और आज तक उनका बोझ ढो रहे हैं. जब तक हम उनसे छुटकारा नहीं पाएंगे ख़ुद काे ठीक नहीं कर सकते.’