बस दो हिस्सों की छोटी सी कहानी है. एक हिस्सा जापान से ताल्लुक रखता है और दूसरा अपने बेंगलुरू से. और दिलचस्प बात यह है कि दोनों हिस्से रेल के डिब्बों सरीखे एक-दूसरे से जुड़ते भी हैं. क्योंकि दोनों में थोड़ा कुछ ऐसा भी है जो एक सा है.

यह जनवरी 2016 की बात है. जापान से निकली एक ख़बर ने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरी थीं. यहां के उत्तर-पश्चिमी छोर पर स्थित होकाइदो में रेल लाइन पर एक स्टेशन होता था कामी-शिराटाकी. इस इलाके में ट्रेनों का संचालन करने वाली होकाइदो रेलवे कंपनी (एचआरसी) इस स्टेशन को बंद करना चाहती थी. लेकिन कर नहीं पाई क्योंकि हाईस्कूल में पढ़ने वाली एक बच्ची इस स्टेशन का इस्तेमाल करती थी. यहां से ट्रेन पकड़कर वह स्कूल जाती थी. यकीन करना मुश्किल है, लेकिन एचआरसी पूरे सत्र में सिर्फ उसी एक बच्ची के लिए उस स्टेशन तक ट्रेन चलाती रही. फिर दो महीने बाद जब उसकी पढ़ाई पूरी हो गई तब मार्च-2016 में उस ट्रेन और कामी-शिराटाकी स्टेशन को बंद किया गया.

जापान के कामी-शिराटाकी स्टेशन पर ट्रेन का इंतज़ार करती बच्ची.
जापान के कामी-शिराटाकी स्टेशन पर ट्रेन का इंतज़ार करती बच्ची.

यह ख़बर उस वक़्त जिसके भी सामने आई उसने यही कहा, ‘अपने यात्रियों की ऐसी कद्र तो सिर्फ जापान में ही हो सकती है.’ पूरा-पूरा जापान सा भले न हो, लेकिन लगता है थोड़ा-बहुत अपना देश भी उसी दिशा में बढ़ रहा है. इसका ताजा उदाहरण है कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरू की नम्मा मेट्रो का. इसी मंगलवार रात की बात है. रात क़रीब 11-11.30 के बीच का वक़्त होगा. केम्पेगौड़ा स्टेशन से नागसंद्र की तरफ जाने वाली ग्रीन लाइन की आख़िरी मेट्रो तीन नंबर प्लेटफॉर्म से छूट चुकी थी. मंत्री मॉल स्टेशन तक पहुंच भी गई थी कि तभी उसे केम्पेगौड़ा स्टेशन वापस बुला लिया गया. वजह यह थी कि रात की उस आख़िरी ट्रेन से नियमित यात्रा करने वाले क़रीब 20 यात्री वहीं रह गए थे.

बीएमआरसीएल (बेंगलुरू मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड) के सूत्र डेक्कन हेराल्ड से बातचीत में इसकी पुष्टि करते हैं. साथ ही बताते हैं, ‘बीएमआरसीएल ने नीति बनाई है कि रात की आख़िरी ट्रेन नियमित रूप से सफर करने वाले अपने किसी यात्री को किसी भी परिस्थिति में छोड़कर नहीं (लीव नाे पैसेंजर बिहाइंड पॉलिसी) जाएगी. हर स्टेशन से वह आगे तभी बढ़ेगी जब स्टेशन नियंत्रक उसे रवाना होने की इजाज़त दे देंगे. लेकिन चूंकि ग्रीन लाइन की उस मेट्रो के ड्राइवर ने इस मामले में गलती की. इसलिए उसे वापस लौटना पड़ा.’ सो हुई न यह कहानी थोड़ी-बहुत जापान सरीखी?