नोटबंदी के बाद लाई गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई) के तहत मार्च अंत तक 4,900 करोड़ रुपये का कालाधन घोषित किया गया. आयकर विभाग के एक अधिकारी के अनुसार करीब 21 हजार लोगों ने यह घोषणा की है. इससे सरकार को 2,451 करोड़ रुपये का कर राजस्व मिला है. यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आठ नवंबर को 500 और 1,000 के नोटोंं को बंद करने के बाद शुरू की गई थी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार आयकर विभाग ने यह भी बताया कि कुछ मामलों में इस घोषणा के बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी है. यह योजना पिछले साल दिसंबर में वित्त मंत्रालय लाया था. इसके तहत घोषित की जाने वाली राशि पर 50 फीसदी का आयकर और जुर्माना देना था. साथ ही 25 फीसदी राशि को अगले चार सालोंं तक बिना किसी ब्याज के पास सरकार के पास जमा करना था.

वैसे इस योजना की समय-सीमा खत्म होने के बाद इस साल मार्च में राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने बताया था कि योजना को उम्मीद से बहुत कम समर्थन मिला. बाद में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि इस योजना के पहले आय घोषणा योजना और नोटबंदी भी लाई गई थी इसलिए इन तीनों योजनाओं के तहत सरकार को हुई सभी घोषणाओं को मिलाकर देखना चाहिए. उन्होंने पीएमजीकेवाई को कालाधन घोषित करने की दिशा में अंतिम मौका बताया था. इससे पहले जून 2016 से सितंबर 2016 तक चली आय घोषणा योजना के तहत करीब 71 हजार लोगों ने 67,382 करोड़ रुपये की राशि घोषित की थी. इससे सरकार को करीब 13 हजार करोड़ रुपये का कर मिला था.