गौरी लंकेश की हत्या के मामले में सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को लेकर यह दावा किया जा रहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘गुंडा’ कहा है. फ़ेसबुक और ट्विटर पर बड़ी संख्या में लोग इस दावे को शेयर कर रहे हैं. हालांकि रवीश कुमार ने इस आरोप को नकारते हुए अपने फ़ेसबुक अकाउंट से सफाई दी है और इसे कई वेबसाइटों ने प्रकाशित भी किया है.
अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में रवीश कुमार ने कहा है, ‘अफ़वाहों का तंत्र इतना व्यापक हो चुका है कि खंडन का भी मतलब नहीं रह गया है. पैटर्न यह है कि आपकी जो बात सत्ता को चुभ रही हो, उसी के समानांतर एक नई बात की छवि तैयार की जाए जिससे चुभकर लोग आपसे नाराज़ हों. ज़ाहिर है ऐसा (प्रधानमंत्री को गुंडा) बोला नहीं है वरना वीडियो होता.’ रवीश कुमार का कहना है कि उन्होंने ऑनलाइन जगत के एक हिस्से को गुंडा ज़रूर कहा था. अब सवाल उठता है कि प्रधानमंत्री को ‘गुंडा’ कहने की बात आखिर कहां से निकल आई?
गौरी लंकेश की हत्या के अगले दिन दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में पत्रकारों ने इस घटना का विरोध किया था. रवीश कुमार भी इसमें शामिल हुए थे. यहां उन्होंने क़रीब 10 मिनट का एक भाषण दिया. इसी में उन्होंने ने गुंडा शब्द का इस्तेमाल किया था.
इस भाषण के वीडियो में 9.01 मिनट पर रवीश ‘गुंडा’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए दिख रहे हैं. लेकिन यहां उन्होंने कहीं भी ‘प्रधानमंत्री’ या ‘नरेंद्र मोदी’ नहीं बोला है. इसी दिन रवीश कुमार ने कुछ अन्य न्यूज़ वेबसाइटों को भी इंटरव्यू दिया था. इन सबको ध्यान से देखने-सुनने पर पता चलता है कि यहां कहीं भी रवीश कुमार ने यह शब्द नहीं बोला है. यह शब्द उन्होंने सिर्फ प्रेस क्लब में दिए भाषण में इस्तेमाल किया था और यहां भी उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गुंडा नहीं कहा था.
इस विवाद का एक पहलू और भी है. कई फ़र्ज़ी न्यूज़ वेबसाइटें ‘रवीश कुमार ने प्रधानमंत्री को गुंडा कहा’ शीर्षक या कैच लाइन का इस्तेमाल पाठकों को अपने पोर्टल तक लाने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं. इससे यह झूठ और ज़्यादा फैल रहा है. ऐसी ही एक वेबसाइट srishtanews.com ने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट की तस्वीर (नीचे दी गई पहली तस्वीर) में हेडिंग दी है, ‘मुझे दुख है, मोदी जैसा गुंडा मेरा प्रधानमंत्री है - रवीश कुमार’. लेकिन ख़बर पढ़ने के लिए जब आप पोस्ट पर क्लिक करते हैं तो पोर्टल पर आपको एक दूसरी हेडिंग (नीचे दी हुई दूसरी तस्वीर) लाइन मिलती है.


यहां हेडिंग है, ‘मुझे दुख है कि मोदी गुंडा जैसे लोगों को फ़ॉलो करते हैं- रवीश कुमार’. एक व्यक्ति के एक कथित बयान को दो तरीक़े से पेश करना सवाल पैदा करता है, और जांच करने पर साफ़ पता चलता है कि यह दावा और इसके आधार पर फैलाए जा रहे पोस्ट झूठे और भ्रामक हैं.
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