ऑटो एक्स्पो-2018 में कई बड़ी कंपनियों के शामिल न होने की खबरों से ऑटोमोबाइल प्रशंसकों में निराशा है. सूत्रों की मानें तो जर्मन ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन अपनी सहयोगियों ऑडी और स्कोडा सहित ऑटो एक्सपो में भाग न लेने का मन बना चुकी है. जानकारों का कहना है कि फॉक्सवैगन के अलावा बजाज ऑटो, रॉयल इनफील्ड, जनरल मोटर्स, फोर्ड और निसान जैसी कंपनियां भी इस मोटर शो से नदारद रह सकती हैं. हर दो साल में होने वाले ऑटो एक्स्पो को इस बार सोसायटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल्स (सियाम) और सीआईआई जैसी संस्थाएं ग्रेटर नोएडा में आयोजित कर रही हैं.

पिछले कुछ सालों से कई बड़ी कंपनियां अलग-अलग कारणों से इस शो से गैरहाजिर होने लगी हैं. इससे पहले स्कोडा ने ऑटो एक्स्पो-2016 में भी भाग नहीं लिया था. स्कोडा के अलावा बजाज मोटर्स ने भी पिछली बार इस शो से यह कहते हुए कन्नी काट ली थी कि बाजार में नए और कम पहचाने जाने वाले ब्रांड्स को अपनी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए इस प्लेटफॉर्म की ज्यादा जरूरत है. दरअसल इस शो को लेकर रिटर्न ऑफ इनवेस्टमेंट से जुड़ी आशंकाएं समय-समय पर संबंधित कंपनियों द्वारा जताई जाती रही हैं, खासकर तब जब आयोजन स्थल दिल्ली शहर से 25-30 किमी दूर रखा गया हो. जानकारोंं के मुताबिक मुख्य शहर से आयोजन के इतने दूर होने की वजह से ज्यादा लोग इस शो में नहीं पहुंच पाएंगे.

हालांकि इसके बावजूद शो में दिलचस्पी दिखाने वाली कंपनियों की संख्या भी कम नहीं है. ऑटो एक्स्पो-2018 में भाग लेने वाले नए खिलाड़ियों में दक्षिण कोरिया की किया, चीन की एसएआईसी और फ्रेंच ऑटोमोबाइल कंपनी पूजॉ का नाम शुमार है. ऑटो एक्स्पो-2018 में भाग लेने वाले पुराने दिग्गजों की बात करें तो देश की प्रमुख कार निर्माता कंपनी मारुति, टाटा मोटर्स और हीरो मोटो कॉर्प के साथ जापानी कंपनी होंडा और दक्षिण कोरिया की ह्युंडई के इसमें हिस्सा लेने की जानकारी मिली है. हालांकि एक्स्पो शो में शामिल होने या न होने वाली अधिकतर कंपनियों की तरफ से कोई आधिकारिक सूचना अभी तक जारी नहीं की गई है.

ऑल्टो को पीछे छोड़ डिज़ायर सबसे ज्यादा बिकने वाली कार बनी

लॉन्चिंग के बाद से ही मारुति-सुज़ुकी डिजायर बिक्री के नए आयाम गढ़ती जा रही है. इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए डिजायर ने कंपनी की ही सर्वाधिक बिकने वाली हैचबैक आल्टो को पीछे छोड़ दिया है. पिछले महीने यानी अगस्त 2017 में डिज़ायर की 30,934 यूनिट बिकी थीं जबकि इस दौरान ऑल्टो की 21,521 यूनिट ही बिक पाईं. पिछले साल अगस्त में स्विफ्ट डिज़ायर की बिक्री से इस साल डिज़ायर की बिक्री की तुलना करें तो इसमें 96.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है. डिज़ायर की बिक्री में अप्रत्याशित बढ़ोतरी का श्रेय जानकार इसके बदले हुए आकर्षक लुक और शानदार फीचर्स द रहे हैं.

डिज़ायर के साथ कंपनी की कॉम्पैक एसयूवी ब्रिजा भी अपने सेगमेंट में शानदार प्रदर्शन कर रही है. कंपनी ने पिछले महिने इस सेगमेंट की 6457 कारें बेची थीं जो अपने आप में एक बेहतरीन आंकड़ा है. इसके चलते मारुति-सुज़ुकी की अगस्त महिने में कुल बिक्री पिछले साल की तुलना में 23.8 फीसदी बढ़कर 1.63 लाख वाहन पहुंच गयी. पिछले साल यह आंकड़ा 1.32 लाख यूनिट था. हालांकि घरेलू बाजार में शानदार बढ़त के बावजूद निर्यात के मामले में मारूति पिछले महीने पिछड़ती हुई नज़र आई. उसकी बिक्री का आंकड़ा 4.7 फीसदी गिरकर 11,701 यूनिट रहा.

वैकल्पिक ईंधन को लेकर सरकार की वाहन निर्माताओं को कड़ी चेतावनी

2030 तक पूरी तरह से इलेक्ट्रिक वाहनों पर निर्भर होने की कवायद में जुटी सरकार ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी है. परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने पेट्रोल और डीज़ल वाहनों का निर्माण करने वाली कंपनियों को चेतावनी देते हुए कहा कि या तो वे वैकल्पिक ईंधन से जुड़ी तकनीकें विकसित कर लें या फिर सख्त परिणाम भुगतने को तैयार रहें. बकौल गडकरी, ‘भविष्य पेट्रोल व डीज़ल का नहीं है बल्कि वैकल्पिक ईंधन का है.’ उन्होंने अपने बयान में आगे जोड़ते हुए कहा, ‘प्रदूषण नियंत्रण और वाहन आयात पर लगाम लगाने के लिए सरकार कटिबद्ध है.’ इलेक्ट्रिक वाहनों को चार्ज करने के तरीकों से जुड़े बड़े सवाल पर उनका कहना था, ‘इलेक्ट्रिक वाहनों पर एक कैबिनेट नोट बनकर तैयार है जिसमें चार्जिंग स्टेशनों पर ध्यान दिया जाएगा.’

सियाम के सालाना सम्मेलन में शामिल हुए गडकरी ने इस बारे में और जानकारी देते हुए कहा, ‘मैं इसके लिए तेजी से काम कर रहा हूं. भले ही ये आपको पसंद हो या नहीं. मैं आपसे बिना कहे इन वाहनों को ध्वस्त कर दूंगा.’ कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए गडकरी ने आगे कहा, ‘जो सरकार का समर्थन कर रहे हैं वे फायदे में रहेंगे और जो नोट छापने में लगे हैं उन्हें परेशानी होगी.’ उनके शब्दों में, ‘कंपनियां बाद में यह कहते हए सरकार के पास नहीं आएं कि उनके पास ऐसे वाहनों का भंडार पड़ा है जो वैकल्पिक ईंधन पर नहीं चलते.’

इससे पहले 2030 तक भारतीय बाजार से पेट्रोल-डीज़ल की कारों को हटाने और पूरी तरह से इलेक्ट्रिक कारों पर निर्भर होने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है. वह नवंबर तक केंद्रीय मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए एक हजार इलेक्ट्रिक सेडान कारें खरीदने की योजना पर काम करना शुरू कर चुकी है.