अक्सर देखने को मिलता है कि बड़े से बड़े कॉर्पोरेट ऑफिसों और महंगे से महंगे शॉपिंग मॉल्स में टॉयलेट के दरवाजे थोड़े छोटे होते हैं, यानी जमीन तक नहीं पहुंचते. कई बार लोगों को यह व्यवस्था उनकी प्राइवेसी में खलल डालने वाली लगती है और वे इसकी शिकायत भी करते नजर आते हैं. लेकिन ये दरवाजे लोगों के व्यवहार और कई संभावित परिस्थितियों पर विचार करके ही इस तरह डिजाइन किए गए हैं. चलिए, जानते हैं ये क्या हैं.

सबसे पहले उन लोगों की शिकायत पर बात कर लेते हैं जिन्हें ये दरवाजे प्राइवेसी में बाधा नजर आते हैं. पब्लिक टॉयलेट इस तरह से बनाए जाते हैं कि अगर कोई भीतर है तो बाहर वाले व्यक्ति को बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के और भीतर मौजूद व्यक्ति को डिस्टर्ब किए बिना यह पता चल जाए. इस तरह एक व्यक्ति की जरा सी निजता गंवाने की कीमत पर कई लोगों को बड़ी सहूलियत मिल जाती है. इसके साथ-साथ एक सुविधा यह भी हो जाती है कि अंदर वाले को अगर किसी चीज जैसे - टॉयलेट पेपर वगैरह की जरूरत हो तो वह भी आराम से लिया-दिया जा सकता है.

ये दरवाजे इमरजेंसी की स्थिति में काफी मददगार साबित होते हैं. दरवाजे का लॉक (या कुंडी) जाम होने या टूटने पर अगर कोई व्यक्ति अंदर फंस जाए तो ऐसे दरवाजों में से ऊपर या नीचे से निकलना आसान होता है. या कम से कम बाहर वालों को यह बताया जा सकता है कि कोई भीतर फंस गया है. वहीं जो बच्चे कुंडिया नहीं खोल पाते, वे इन दरवाजों के नीचे से निकल सकते हैं. इसके साथ ही अगर किसी के साथ मेडिकल इमरजेंसी हो जाए. जैसे बेहोश होने, ब्लड प्रेशर बढ़ने या हॉर्ट अटैक होने पर बाहर वालों के लिए यह भांपना थोड़ा आसान हो जाता है कि अंदर कुछ गड़बड़ है. इन दरवाजों के चलते ऐसे में जल्दी मदद मिलने की संभावना बढ़ जाती है.

इसके अलावा दरवाजे आधे बनाने से बाथरूम की साफ-सफाई करना और उसे मेंटेन करना भी थोड़ा आसान हो जाता है. पब्लिक टॉयलेट्स दिनभर इस्तेमाल होते हैं इसलिए यहां दिन में कई बार सफाई की जरूरत होती है. अगर दरवाजा जमीन से सटा होगा तो बाथरूम का एक कोना साफ होने से रह जाएगा.

कुछ लोग पब्लिक स्पेस को विज्ञापन की सबसे अच्छी जगह मानते हैं और मौका मिलते ही पोस्टर चिपकाने से लेकर म्यूरल-ग्रैफिटी बनाने तक के काम को अंजाम दे देते हैं. दरवाजे अधखुले होने से दीवारों पर यह लिखा-पढ़ी करना भी संभव नहीं होता. वहीं इन दरवाजों से टॉयलेट में जरूरत से ज्यादा समय लगाने वाले या यहां नशा करने वाले लोग भी हतोत्साहित होते हैं.

इस सबके साथ ही छोटे दरवाजे बनाने में लागत भी कम आती है. पब्लिक टॉयलेट में एक साथ बहुत सारे चैंबर बनाए जाते हैं इसलिए छोटे दरवाजे बनाने से अपेक्षाकृत खर्चा घट जाता है.