विवेक ओबेरॉय छोड़िए, सलमान ने अभी तक जॉन अब्राहम को भी माफ नहीं किया है!

सलमान कुछ नहीं भूलते. कभी-कभी यह जरूर भूल जाते हैं कि हिट एंड रन केस के बाद उन्हें रोड सेफ्टी से जुड़ी बातें बिलकुल नहीं करनी चाहिए. और दुबई जाकर एक ड्राइविंग स्कूल का उद्घाटन करने का तो सोचना भी नहीं चाहिए, जैसा कि उन्होंने कुछ दिन पहले किया!

खैर, खबर है कि सैफ अली खान को हटाकर सलमान खान अब्बास-मस्तान वाली रेस फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म करने वाले हैं और इसमें उनके साथ सिद्धार्थ मल्होत्रा और जैकलीन फर्नांडिस काम करने वाले हैं. फिल्म का निर्देशन भी अब्बास-मस्तान की जगह रेमो डिसूजा करेंगे और उनके अलावा भी ‘रेस 2’ से जुड़ा एक जरूरी नाम ऐसा है जो अब तीसरी बार रेस करता हुआ नजर नहीं आएगा.

वो नाम है जॉन अब्राहम, जो कि सलमान भाई के विवेक ओबेरॉय जितने पुराने दुश्मन तो नहीं हैं लेकिन आंकड़ा दोनों के बीच छत्तीस का ही चलता है. बात 2006 की है जब एक कॉन्सर्ट के दौरान जॉन और सलमान के बीच उठापटक हो गई थी (नॉट लिटरली!), और तभी से दोनों एक-दूसरे को पसंद नहीं करते. 2011 में अपनी फिल्म को प्रमोट करने के लिए जॉन, सलमान के कार्यक्रम बिग बॉस पर जरूर आए थे और तब लगा था कि दोनों ने गिले-शिकवे भुला दिए हैं, लेकिन जैसी कि कहावत नहीं है – सलमान कुछ नहीं भूलते!

इसी वजह से ‘रेस 2’ में मुख्य खलनायक की भूमिका करने वाले और फिल्म के अंत में वापस लौटने का वायदा करने वाले जॉन अब्राहम ‘रेस 3’ का हिस्सा नहीं होंगे. सलमान खान ने फिल्म से जुड़ी सारी औपचारिकताएं पूरी करने से पहले इस फिल्म के मालिक यानी टिप्स इंडस्ट्रीज के रमेश तोरानी से यह वायदा ले रखा है कि वे किसी भी हाल में जॉन को ‘रेस 3’ का हिस्सा नहीं बनाएंगे. और तोरानी साहब ने भी तपाक से ‘पक्का!’ कहकर डील फाइनल कर ली है क्योंकि वे जानते हैं कि सलमान अकेले ही बॉक्स-ऑफिस की रेस में इस फिल्म को सबसे तेज दौड़ा ले जाएंगे.

इस देश का सेल्फी किंग कौन?

एक जमाने में भीकू म्हात्रे ने समंदर किनारे खड़े होकर पूछा था कि मुंबई का किंग कौन? आजकल रणवीर सिंह भी ऐसे ही अंदाज में जता रहे हैं कि इस देश के सेल्फी किंग वे हैं. यानी कि पब्लिक स्पेस में अपने एसेंट्रिक बर्ताव से लेडी गागा तक को पीछे छोड़ देने की कुव्वत रखने वाला वह भारतीय अभिनेता जो खबरें बटोरने के लिए ऐसा नहीं करता, बल्कि असल जीवन में वो ऐसा ही है. एकदम निराला.

अब रणवीर सिंह कह रहे हैं कि आज के जमाने की नयी संक्रामक बीमारी यानी कि सेल्फी लेने में उन्हें महारत हासिल है. वे इस कला के चौधरी हैं (अर्थात अथॉरिटी), और दिन में औसतन दो दर्जन सेल्फी तो लेते ही लेते हैं. कभी-कभी 50 से 100 भी लेते हैं और जब अपने प्रशंसकों के बीच होते हैं तो सैकड़ों की तादाद में लेते हैं.

ऐसा कहते वक्त हालांकि वे एक नए फोन को लॉन्च कर रहे थे, जिसका सेल्फी कैमरा ही 24 एमपी का था और फोन कंपनी रणवीर के सहारे सेल्फी कल्चर के प्रचार-प्रसार में कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही थी. दूसरी तरफ बाकी बची कसर रणवीर और शाहिद जैसे सभी यंग बॉलीवुड सितारों के इंस्टाग्राम एकाउंट पूरी कर रहे हैं, जहां मौजूद जिम सेल्फी से लेकर जैम खाने तक की सेल्फी की नकल आम जनता जमकर करने लग गई है.

और बताइए! दुनिया बुराई ढिनचक पूजा की करती है, जो इस दशक की सबसे बड़ी महामारी को बेहद करुणा के साथ ‘सेल्फी मैंने ले ली आज’ नामक सोशल कमेंटरी में ढाल चुकी हैं!


‘अगर मुझे पब्लिसिटी ही चाहिए होती तो मैं तीनों खान के साथ फिल्में करती, फेयरनेस क्रीम के विज्ञापन करती, अवॉर्ड फंक्शनों में नाचती और रेड कारपेट पर चलकर इंटरनेट पर सनसनी मचाती’

— कंगना रनोट ('सिमरन' की पब्लिसिटी के लिए रितिक रोशन विवाद को भुनाने के आरोपों पर जवाब देते हुए)

फ्लैशबैक | सत्यजीत रे और किशोर कुमार का अनोखा कनेक्शन

किशोर कुमार ने चार शादियां की थीं और हरेक शादी की वजह से फिल्म इंडस्ट्री में कईयों से उनकी रिश्तेदारी निकलती है! किशोर कुमार की तीसरी पत्नी योगिता बाली मशहूर अभिनेत्री गीता बाली की भतीजी थीं और चूंकि गीता बाली शम्मी कपूर की पहली पत्नी थीं, इसलिए किशोर कुमार और कपूर खानदान की मौजूदा पीढ़ी (रणबीर, करिश्मा और करीना) तक आपस में रिश्तेदार हैं. इसी तरह किशोर कुमार की पहली पत्नी रूमा गुहा ठाकुरता, बिजया रे की भतीजी थीं और बिजया रे की शादी महान फिल्मकार सत्यजीत रे से हुई थी. रे और किशोर कुमार इसी वजह से आपस में रिश्तेदार कहलाए जाते हैं.

लेकिन सिर्फ इस रिश्तेदारी की वजह से किशोर कुमार और सत्यजीत रे के बीच एक अनोखा कनेक्शन नहीं था. एक बेहद मूडी इंसान होने के बावजूद किशोर कुमार, सत्यजीत रे का बेहद सम्मान करते थे और उनके सिनेमा से अति के प्रभावित थे. यह सिनेमाई कनेक्शन रे की पहली फिल्म के वक्त स्थापित हुआ जिसको बनाने के लिए, कहते हैं कि रे ने अपनी बीमा पॉलिसी, पत्नी के गहने और ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स तक बेच दिए थे. लेकिन ‘पाथेर पांचाली’ (1955) फिर भी पूरी नहीं बन पा रही थी और इसलिए किशोर कुमार ने उन्हें अपनी तरफ से पांच हजार रुपए दिए और इसके बाद ही फिल्म रिलीज हुई.

रिलीज होने के बाद किशोर कुमार ने ‘पाथेर पांचाली’ को कई-कई बार देखा, और रे के सिनेमा के इतने कायल हो गए कि जब दस साल बाद खुद के निर्देशन में ‘दूर गगन की छांव’ (1964) जैसी संजीदा फिल्म बनाई, तो दर्शकों से लेकर समीक्षकों तक को उसमें रे के सिनेमा की छाप साफ नजर आई.

उसी साल, 1964 में, रे ने अपनी एक और महान कृति ‘चारुलता’ का निर्माण किया, जिसमें एक गाने के लिए किशोर कुमार की सेवाएं ली गईं. फिल्म का बजट हमेशा की तरह सीमित था और रे चिंतित कि सबसे महंगे गायकों में शामिल किशोर न जाने कितनी फीस लेंगे. ऊपर से किशोर कुमार अपनी फीस को लेकर समझौता नहीं करने वाले चंद कलाकारों में गिने जाते थे और सभी उनका रवैया जानते थे. लेकिन कहते हैं कि जब गाना रिकॉर्ड करने के बाद किशोर कुमार वापस रे के पास आकर बैठे और रे ने पूछा कि इस गाने के लिए उन्हें कितने पैसे देने होंगे, तो यह सुनकर किशोर कुमार अपनी कुर्सी पर से उठे और रे के पैर छूकर बोले कि इस गीत के लिए वे एक रुपया भी नहीं लेंगे.

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