गुरुग्राम (गुड़गांव) स्थित रायन इंटरनेशनल स्कूल में पिछले शुक्रवार को सात वर्षीय छात्र प्रद्युमन की हत्या का मामला सामने आया है. इस नन्हे से बच्चे की लाश बाथरूम से बरामद हुई. प्रद्युमन के माता-पिता सहित बाकी अभिभावकों ने हत्या के पीछे स्कूल प्रबंधन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है और इसको लेकर वे चार दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. पुलिस ने प्रद्युमन की हत्या के सिलसिले में बस कंडक्टर अशोक कुमार को गिरफ्तार किया है. अशोक ने माना है कि उसने बच्चे के यौन शोषण की कोशिश की थी और फिर चाकू से गोदकर उसकी हत्या कर दी.

हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम बिलास शर्मा ने कहा है कि अगर जांच के बाद स्कूल में लापरवाही की बात सामने आई तो उसका अनापत्ति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया जाएगा. यह घटना सभी राज्य सरकारों के लिए एक चेतावनी है कि वे स्कूलों में छात्रों की सुरक्षा के लिए एक बुनियादी मानदंड तय करें और उसे सभी स्कूलों में लागू करवाएं.

पता चला है कि गुरुग्राम के स्कूल में छात्रों की सुरक्षा को लेकर कई स्तरों पर खामियां थीं. यहां बाथरूमों में छोटे बच्चों की मदद के लिए कोई अलग से स्टाफ तैनात नहीं था. चूंकि इन बाथरूमों में शिक्षकों के जाने की मनाही है सो ऐसे में किसी भी यौन आपराधिक प्रवृत्ति वाले व्यक्ति के लिए इनको निशाना बनाना आसान हो जाता है. यह भी गौर करने वाली बात है कि हत्यारा स्कूल में आसानी से चाकू जैसा हथियार लेकर घुस गया था.

पिछले साल रायन स्कूल का दिल्ली स्थित परिसर भी एक ऐसे ही मामले में सुर्खियां में आया था. यहां एक छह वर्षीय बच्चे की पानी की टंकी में गिरकर मौत हो गई थी. राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने अपनी जांच में पाया था कि इस स्कूल के कर्मचारियों का पुलिस वेरीफिकेशन भी नहीं कराया गया था. दुर्भाग्य से ये कुछ ऐसी अनियमितताएं हैं जो देश के ज्यादातर स्कूलों में बेहद आम हैं.

जिन स्कूलों में सुरक्षा के पूरे इंतजाम नहीं हैं उनको लेकर यह भी एक गलत धारणा है कि यहां सिर्फ लड़कियों को यौन शोषण का शिकार बनाया जा सकता है. हालांकि बेंगलुरू और मुंबई जैसे शहरों के स्कूलों से छोटी-छोटी बच्चियों के शोषण की खबरें लगातार आती रहती हैं लेकिन रायन इंटरनेशनल स्कूल की घटना से साफ है कि लड़कों को भी बराबर की सुरक्षा की दरकार है. हरियाणा सरकार को अब इस मामले में निष्पक्ष और तेजी से जांच कराने की जरूरत है ताकि प्रद्युमन की हत्या के लिए जिम्मेदार तमाम लोगों को सजा दिलाई जा सके. वहीं इसके साथ सरकारों को इस घटना से सबक सीखना है और स्कूलों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करनी है. (स्रोत)