केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की तरह उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार भी अपने नाकारा और दागी अफसरों को जबरन रिटायरमेंट दे सकती है. सूत्रों के हवाले से द टाइम्स ऑफ इंडिया ने जो ख़बर दी है उसके मुताबिक इस सिलसिले में तैयारी शुरू की जा चुकी है. सरकार जल्द ही ऐसे अफसरों की सूची सार्वजनिक कर सकती है.

सूत्र बताते हैं कि राज्य के मुख्य सचिव राजीव कुमार ने आठ सितंबर को सभी विभाग प्रमुखों को पत्र लिखा है. इसमें 15 सितंबर तक दागी-नाकारा अफसरों/कर्मचारियों की पहचान करने को कहा गया है. इन अफसरों/कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जाएगी. यही नहीं योगी सरकार ने उन वरिष्ठ अफसरों से भी मुक्ति पाने की तैयारी कर ली है जिन्हें पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के कार्यकाल में सेवा विस्तार मिला था.

एक वरिष्ठ अधिकारी ने अखबार को बताया कि अफसरों और कर्मचारियों का आकलन करने के लिए उनके पिछले 10 साल के सर्विस रिकॉर्ड को आधार बनाया जाएगा. साथ ही विभाग में उनकी साख कैसी है यह भी देखा जाएगा. ऐसे सात मापदंड होंगे जिनके आधार पर ऐसे अफसरों/कर्मचारियों की सूची तैयार की जाएगी. इस आकलन प्रक्रिया के दायरे में फिलहाल वे लोग अधिक होंगे जिनकी उम्र 50 साल या उससे अधिक हो चुकी है.

ग़ौरतलब है कि केंद्र के स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार भी इसी तरह की प्रक्रिया संचालित कर रही है. सूत्रों की मानें तो केंद्र सरकार ने ग्रुप-ए के 30,000 और ग्रुप-बी के 40,000 अफसरों की पहचान कर ली है. इन्हें नाकारा और भ्रष्ट माना गया है. जल्द ही इन अफसरों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है.