फर्ज़ी बाबाओं से जुड़े विवाद लगातार उजागर होने के बाद हिंदू संतों की शीर्ष संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) ने सख़्त रुख अख़्तियार किया है. उसकी ओर से रविवार को 14 फर्ज़ी बाबाओं की सूची ज़ारी कर इनके बारे में न सिर्फ आम जनता तो सचेत किया गया बल्कि सरकार से भी इनके ख़िलाफ सख़्त कार्रवाई की मांग की गई.

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक एबीएपी के अध्यक्ष स्वामी नरेंद्र गिरि ने यह सूची ज़ारी करते हुए कहा, ‘हम लोगों से आग्रह करते हैं कि ऐसे फर्ज़ी बाबाओं के चक्कर में न पड़ें. इनका किसी धर्म-परंपरा से कोई ताल्लुक नहीं है. बल्कि इनके कामों की वज़ह से साधु-संन्यासियों का नाम ही ख़राब हो रहा है.’ बताते चलें कि एबीएपी के तहत हिंदू समुदाय के सभी 14 मान्यता प्राप्त अखाड़े आते हैं. इस मसले पर विचार करने के लिए रविवार को ही इलाहाबाद में हुई बैठक में इन सभी अखाड़ों के प्रतिनिधि मौज़ूद थे. इस बैठक के बाद फर्ज़ी बाबाओं की सूची सार्वजनिक की गई.

एबीएपी की सूची में शामिल फर्ज़ी बाबा

1. आसाराम बापू, 2. नारायण साईं (आसाराम का बेटा), 3. सुखबिंदर कौर (राधे मां), 4. गुरमीत राम रहीम, 5. निर्मलजीत सिंह (निर्मल बाबा), 6. स्वामी असीमानंद, 7. सचिन दत्ता (सच्चिदानंद गिरी), 8. विवेकानंद झा (ओम बाबा), 9.शिवमूर्ति द्विवेदी (इच्छाधारी भीमानंद), 10. ओम नम: शिवाय बाबा, 11. रामपाल (सतलोक आश्रम), 12. आचार्य कुशमनी, 13. ब्रहस्पति गिरि, 14. मलखान सिंह.

दिवाली बाद 28 फर्ज़ी बाबओं के नाम और उजागर होंगे

स्वामी नरेंद्र गिरि ने बताया, ‘दिवाली बाद 28 फर्ज़ी बाबाओं के नाम और सार्वजनिक किए जाएंगे. हम इनके नामों की सूची केंद्र और राज्य की सरकारों को भी भेज रहे हैं. सभी विपक्षी दलों को भी यह सूची भेजी जा रही है. साथ ही सरकार से मांग करते हैं कि फर्ज़ी बाबाओं की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कानून बनाया जाए.’

एबीएपी ने इस बैठक में यह भी तय किया है कि अब संत की पदवी देने की निश्चित प्रक्रिया होगी. एबीएपी के एक शीर्ष पदाधिकारी के मुताबिक, ‘किसी को संत की पदवी तभी मिलेगी जब उसके आचार-व्यवहार के बारे में अच्छी तरह पड़ताल कर ली जाएगी. इसके तहत संत की पदवी की अपेक्षा रखने वाले की जीवनशैली का भी एक निश्चित समय तक आकलन किया जाएगा. इसके बाद ही उसे संत घोषित किया जाएगा.’

सूत्रों के मताबिक यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है ताकि अपने डेरा की साध्वियाें से ही बलात्कार के दोषी गुरमीत राम रहीम जैसे लोग ‘संत की प्रतिष्ठा’ का दुरुपयाेग न कर सकें. सूत्र यह भी बताते हैं कि एबीएपी ने यह भी तय किया है कि अब कोई भी संत अपने पास नगद रकम नहीं रख सकेगा. यही नहीं घोषित संत अपने नाम पर किसी तरह की संपत्ति भी नहीं रख पाएंगे. उनके पास जो भी नगद या संपत्ति होगी उसका मालिकाना हक ट्रस्ट के पास होगा और इसका इस्तेमाल सिर्फ लोगों के भले के लिए ही किया जा सकेगा.

एबीएपी के साथ मिलकर काम करने वाली संघ परिवार की संस्था- विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के संयुक्त महामंत्री सुरेंद्र जैन के मुताबिक, ‘अखाड़ा परिषद को लगता है कि संत की पदवी का लगातार दुरुपयोग हो रहा है. महज़ एक-दो गलत लोगों की वज़ह से पूरा संत समाज बदनाम हो रहा है. इसीलिए अब संत की पदवी देने के लिए व्यवस्थित तंत्र विकसित करने और उसे अपनाने का फैसला किया गया है.’