केंद्र सरकार मोबाइल सिम कार्ड को बायोमेट्रिक पहचान संख्या (आधार) से जोड़ने के मामले में उपभोक्ताओं को कोई राहत नहीं देने जा रही है. सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी आईएएनएस ने कहा है कि अगले साल फरवरी से वे सारे मोबाइल सिम कार्ड काम करना बंद कर देंगे जिन्हें उपभोक्ता अपने आधार से नहीं जोड़ पाएंगे. सरकार इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दे रही है.

इसी साल फरवरी में लोकनीति फाउंडेशन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी सिम कार्ड का आधार के जरिए सत्यापन कराने का आदेश दिया था और इसके लिए एक साल का समय दिया था. अदालत ने अपराधियों, जालसाजों और आतंकवादियों द्वारा सिम कार्ड का दुरुपयोग रोकने के लिए इसे जरूरी बताया था. फरवरी में केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को आश्वासन दिया था कि एक साल के भीतर सभी प्रीपेड मोबाइल सिम कार्ड को आधार से जोड़ने के लिए प्रभावी इंतजाम करेगा. हालांकि, द इकॉनॉमिक टाइम्स के मुताबिक अभी तक केवल एक चौथाई मोबाइल सिम कार्ड ही आधार से जुड़ पाए हैं. देश में इस समय चालू मोबाइल कनेक्शन 128 करोड़ के आसपास हैं.

उधर, टेलिकॉम ऑपरेटर्स के साथ आधार संबंधी सूचना साझा करने पर इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है. हालांकि, सूत्रों का कहना है कि इसमें टेलिकॉम ऑपरेटर्स को उपभोक्ताओं की बायोमेट्रिक जानकारी को अपने पास जमा करने का कोई अधिकार नहीं है. उनके मुताबिक टेलिकॉम ऑपरेटर्स उपभोक्ताओं का सत्यापन करने के बाद उनकी बायोमेट्रिक जानकारी भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को सौंप रहे हैं, क्योंकि आधार अधिनियम-2016 के तहत अगर कोई भी सेवा प्रदाता ऐसी सूचनाएं जमा करता है तो उसे तीन साल तक की सजा हो सकती है.