सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने से परेशान घर खरीदारों के हितों की रक्षा करने की बात कही है. सोमवार को शीर्ष अदालत ने कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की इजाजत दे दी. लेकिन, इसके साथ ही उसने, जेपी इंफ्राटेक की मूल कंपनी जेपी एसोसिएट्स को 27 अक्टूबर तक 2,000 करोड़ रुपये जमा कराने का निर्देश दिया है. इसके अलावा शीर्ष अदालत ने जेपी एसोसिएट्स के निदेशकों के विदेश जाने पर रोक लगा दी है. इससे पहले चार सितंबर को शीर्ष अदालत ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी.

द इकनॉमिक टाइम्स के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक का प्रबंधन नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा गठित इनसॉल्वेंसी रेजोल्शयून प्रोफेशनल (आईआरपी) को सौंप दिया है. इसके साथ अदालत ने आईआरपी को 45 दिनों के भीतर घर खरीदारों के हितों को ध्यान में रखकर अंतरिम योजना पेश करने का भी निर्देश दिया है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, ‘हमें कंपनियों की नहीं, घर खरीदारों के हितों की चिंता है.’ समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक अदालत ने यह भी कहा कि घर खरीदारों के हितों को सुरक्षित रखा जाएगा. इसके साथ अदालत ने एक न्याय मित्र की भी नियुक्ति की जो आईआरपी द्वारा आयोजित बैठकों में शामिल होगा और घर खरीदारों के हितों का ध्यान रखेगा. इस मामले की अगली सुनवाई 13 नवंबर को होगी.

उधर, घर खरीदारों ने इस फैसले पर खुशी जताई है. उनके अधिवक्ता रमाकांत राय ने कहा, ‘इससे घर खरीदार खुश हैं.’ उन्होंने आगे कहा कि घर खरीदारों ने दिवालिया प्रक्रिया के दौरान उनके हितों की रक्षा के लिए अदालत की तरफ से किसी व्यक्ति को नियुक्त करने की मांग की थी, जिसे अदालत ने मान लिया है.

अगस्त में आईडीबीआई बैंक की याचिका पर एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड-2016 के तहत कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया था. इससे दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में इसकी आवासीय परियोजनाओं में घर खरीदने वाले 32 ​हजार परिवारों का घर पाने का सपना अधर में लटक गया था. पिछले महीने घर खरीदारों ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी.