संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ हिंसा की तीखे शब्दों निंदा की है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायोग (यूएनएचसीएचआर) के प्रमुख जैद राद अल-हुसैन ने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ जारी सैन्य अभियान को क्रूर बताते हुए इसे रोकने की अपील की है. संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, ‘म्यांमार की स्थिति जातीय उन्मूलन के उदाहरण जैसी है.’ द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार जैद राद अल हुसैन ने आगे कहा, ‘हमें मिलीं कई रिपोर्ट और सेटेलाइट तस्वीरें बताती हैं कि सुरक्षाबल और स्थानीय लड़ाके रोहिंग्या मुसलमानों के गांवों को जला रहे हैं. इसके अलावा भाग रहे नागरिकों पर गोलीबारी करने सहित उनकी गैर-न्यायिक हत्याएं भी लगातार जारी हैं.’

रिपोर्ट के मुताबिक यूएनएचसीएचआर के प्रमुख जैद राद अल-हुसैन ने रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने की भारत की घोषणा की भी निंदा की. भारत को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति जवाबदेह बताते हुए उन्होंने कहा, ‘भारत सामूहिक तौर पर इन्हें नहीं निकाल सकता है या ऐसी जगह पर नहीं भेज सकता है, जहां इनके लिए उत्पीड़न या हिंसा का खतरा मौजूद है.’ उनके मुताबिक भारत में शरण लेने वाले 40 हजार रोहिंग्या मुसलमानों में 16,000 के पास शरणार्थी दस्तावेज मौजूद हैं.

म्यांमार में दो हफ्ते पहले रोहिंग्या विद्रोहियों ने एक पुलिस और सैन्य ठिकाने हमला कर दिया था, जिसके बाद से सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी है. हालांकि, सुरक्षाबलों पर रोहिंग्या मुसलमानों का उत्पीड़न करने और उन्हें पलायन के लिए मजबूर करने के आरोप लगे हैं. खबरों के मुताबिक इस दौरान लगभग तीन लाख रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से पलायन कर चुके हैं. इनमें से 2.7 लाख रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश पलायन किया है, लेकिन ज्यादातर सीमाओं पर फंसे हुए हैं.