फर्ज़ी बाबाओं से जुड़े विवाद लगातार उजागर होने के बाद हिंदू संतों की शीर्ष संस्था अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (एबीएपी) ने सख़्त रुख अख़्तियार किया है. उसकी ओर से रविवार को 14 फर्ज़ी बाबाओं की सूची ज़ारी कर इनके बारे में न सिर्फ आम जनता तो सचेत किया गया बल्कि सरकार से भी इनके ख़िलाफ सख़्त कार्रवाई की मांग की गई है. सोशल मीडिया पर आम लोगों ने एबीएपी के इस कदम का स्वागत किया है. आलोक तिवारी ने ट्वीट कर सुझाव दिया है, ‘... अब बाकी अन्य समुदायों को भी ऐसी सूची जारी करनी चाहिए.’ वहीं फेसबुक पर सोम प्रभ ने सवाल उठाया है, ‘सिर्फ 14 फर्जी बाबा की लिस्ट? बाकी जो राजनीतिक दलों की सेवा में हैं और कारोबारी बाबा हैं उनका क्या होगा? सांप्रदायिक भाषण देने वाले साधु और साध्वियों की भी कोई सूची बने...’

भारतीय जनता पार्टी ने जाने-माने इतिहासकार रामचंद्र गुहा को लीगल नोटिस भेजकर अपने बयान के लिए माफी मांगने को कहा है. सत्याग्रह की सहयोगी वेबसाइट स्क्रोलडॉटइन को दिए एक इंटरव्यू में रामचंद्र गुहा चर्चित पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या में संघ परिवार का हाथ होने की संभावना जताई थी. भाजपा ने कहा है कि अगर उन्होंने तीन दिन के भीतर बिना शर्त माफी नहीं मांगी तो उनके खिलाफ दीवानी और फौजदारी के तहत अदालती कार्रवाई की जाएगी. इस खबर के चलते रामचंद्र गुहा सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं और भाजपा समर्थकों ने उनकी खूब आलोचना की है. वहीं इस मामले पर कृष्णा ने ट्वीट कर पूछा है, ‘सिर्फ रामचंद्र गुहा को निशाना क्यों बनाया गया है?... कई पत्रकारों और चैनलों ने जोर-जोर से यही बात कही है.’

इन दोनों खबरों पर सोशल मीडिया में आई कुछ और प्रतिक्रियाएं :

दिग्विजय सिंह | @digvijaya_28

मैं सम्माननीय अखाड़ा परिषद से पूछना चाहता हूं. क्या मनु स्मृति में किसी भगवा वस्त्र पहनने वाले को व्यापार करने की स्वीकृति है?

आलोक पुराणिक | facebook/Puranik

अखाड़ा परिषद ने फर्जी बाबाओं की घोषणा की है. लगे हाथ प्रमाणिक बाबागिरी का कोर्स भी घोषित कर देती. बाबाओं का स्किल इंडिया हो जाता.

इंडियन हिस्टरी पिक्स | @IndiaHistorypic

1951 : आचार्य विनोबा भावे ने धनी-मानी लोगों से भूमिहीनों को जमीन दान करने के लिए भूदान आंदोलन की शुरुआत पोचमपल्ली से की थी. (आज विनोबा का जन्मदिन है)

टी विद देव | @teawithdev

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 14 फर्जी बाबाओं की सूची जारी की है लेकिन इसमें राहुल ‘बाबा’ का नाम शामिल क्यों नहीं है?

अनिल कुमार सिंह | @MrAnilKumarSing

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता आरोप लगाने की स्वतंत्रता (बिना सबूत के) से अलग है और यह बात रामचंद्र गुहा जैसे बुद्धिजीवियों पर भी लागू होती है.

नितिन सुदर्शन | @nithinsudarsana

रामचंद्र गुहा, आपकी बात में कुछ भी गलत नहीं था. अब हम चाह रहे हैं कि आप इसके पक्ष में सबूत पेश करें या माफी मांगें.

रोहित शर्मा | @ImRo450

गौरी लंकेश की हत्या के मामले में रामचंद्र गुहा की कमाल की पड़ताल देखते हुए रॉ ने उनसे संपर्क किया है और अपना एजेंट बनने का प्रस्ताव दिया है.