नोटबंदी का एक बड़ा मकसद देश से नकली मुद्रा की समस्या को खत्म करना भी बताया गया था. और हिंदुस्तान टाइम्स में सूत्रों के हवाले से आई ख़बर की मानें तो यह मकसद पूरा नहीं तो थोड़े-बहुत हिस्सों में शायद हासिल हो चुका है. ख़ास तौर पर पाकिस्तान से भारत की सीमा में आने वाली जाली मुद्रा पर लगाम लगी दिख रही है.

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सूत्रों के मुताबिक पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगने वाले 13 सीमाई इलाकों से होकर नकली मुद्रा भारत आती थी. ये इलाके जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, असम और मेघालय से लगते हैं. लेकिन नवंबर-2016 में लागू हुई नोटबंदी के बाद इनमें से 11 सीमाई इलाकों में नकली मुद्रा बरामद होने के मामले लगभग न के बराबर ही सामने आए हैं.

जबकि बांग्लादेश में 2000 के नकली भारतीय नोट बड़ी तादाद छापे जाने के संकेत मिल रहे हैं. बीएसएफ के ख़ुफिया सूत्रों की मानें तो नोटबंदी के बाद पाकिस्तान में संभवत: नकली नोट छापने वाले गिरोह ने अब तक नए सिरे से बड़ा निवेश नहीं किया है. जबकि बांग्लादेश में सक्रिय इस गिरोह ने 2000 के नकली नोट छापने के लिए सऊदी अरब और मलेशिया से उपयुक्त कागज मंगवाना भी शुरू कर दिया है.

शायद इसीलिए असम-पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से लगते सीमा क्षेत्रों में नकली भारतीय नोटों की बरामदगी बढ़ी है. सूत्रों के मुताबिक जनवरी में इन क्षेत्रों से एक लाख रुपए मूल्य के नकली नोट बरामद हुए. जबकि फरवरी में 2.96 लाख व मार्च में 4.60 लाख मूल्य के. अप्रैल में तो नकली नोटों की तादाद बढ़कर 20 लाख रुपए तक पहुंच गई. इन्हीं संकेतों के बाद अब बीएसएफ ने बांग्लादेश की सीमा पर सख्ती भी बढ़ा दी है.