2014 के लोकसभा चुनाव में मिली हार के तीन साल बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने माना है कि यूपीए-2 के कार्यकाल के दौरान उनकी पार्टी में थोड़ा अहंकार आ गया था. उन्होंने कहा कि इस अहंकार ने पार्टी में संवाद की संस्कृति खत्म कर दी. कैलिफ़ॉर्निया विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को संबोधित करने के बाद एक सेशन में कांग्रेस उपाध्यक्ष का यह भी कहना था कि भारत में दस साल तक सत्ता में रहनेवाली किसी भी पार्टी में यह समस्या स्वाभाविक है. राहुल गांधी इन दिनों दो हफ्ते की अमेरिका यात्रा पर हैं.

राहुल गांधी ने कहा कि 2004 में उनकी पार्टी ने जो योजना तैयार की थी वह ज्यादा से ज्यादा एक दशक के लिहाज से ठीक थी. उनका कहना था, ‘2010-11 आते-आते इसका समय पूरा हो चुका था.’ राहुल गांधी ने कांग्रेस को एक संवाद की तरह बताया. उन्होंने कहा, ‘हम संवाद करके एक परिकल्पना तैयार करते हैं. लेकिन मैं यह कहूंगा कि 2012 के आसपास कांग्रेस पार्टी में कुछ अहंकार आ गया था और उसने संवाद करना बंद कर दिया.’

राहुल ने कहा कि दोबारा खड़ा होने के लिए कांग्रेस पार्टी को एक परिकल्पना तैयार करने की ज़रूरत है जो भारत को आगे ले जा सके. राहुल गांधी ने कहा कि बीजेपी की सरकार ने नरेगा या जीएसटी जैसी योजनाओं का केंद्रीय ढांचा यूपीए सरकार से ही लिया है. उन्होंने कहा, ‘लेकिन अब यह ढांचा काम नहीं करता. हम यह बात जानते हैं.’

राहुल गांधी का यह भी कहना था कि वे प्रधानमंत्री पद की उम्मीदवारी के लिए तैयार हैं. हालांकि उनका कहना था कि यह फैसला कांग्रेस पार्टी को लेना है. कांग्रेस के भविष्य को लेकर राहुल गांधी ने कहा कि पार्टी में परिवर्तन लाए जाने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा, ‘आप सभी वरिष्ठों को एकतरफ़ नहीं हटा सकते. आपको लोगों को एकसाथ लाना होगा, कुछ नए चेहरों को रखना होगा, कुछ पुराने चेहरों को रखना होगा. यह समझौता है. एक दृष्टिकोण है.’

राहुल गांधी ने कहा, ‘भारत में 40-50 करोड़ युवा हो गए हैं. हमारे लिए यह कहना उचित नहीं है कि हम उन्हें कोई सपना नहीं देने जा रहे. ऐसा नहीं किया जा सकता. क्योंकि अगर आप उन्हें कोई सपना नहीं देते हैं तो आप एक बहुत ख़तरनाक जगह में दाखिल होते हैं. अगर आप 2012 से देखें तो हुआ यह है कि भारत ने अपना सपना खो दिया है.’