तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे अत्याचारों को लेकर म्यांमार को नसीहत दी है. उन्होंने कहा कि आज बुद्ध होते तो निश्चित रूप से सताए जा रहे रोहिंग्या मुसलमानों की मदद करते. दलाई लामा ने कहा कि म्यांमार को बुद्ध को याद करना चाहिए. बताया जा रहा है कि भारत के इस पड़ोसी देश में हिंसा के चलते बीते दो हफ्ते में तीन लाख से भी ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान अपने घरों को छोड़कर भाग चुके हैं.

दलाई लामा का यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत सरकार अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने की बात कई बार कर चुकी है. संयुक्त राष्ट्र ने भारत के इस रुख़ की एक बार फिर आलोचना की है. जनसत्ता के मुताबिक़ संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों के अलावा गौहत्या और पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर भी नरेंद्र मोदी सरकार के रवैये की आलोचना की है. संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संघ के प्रमुख जैद राद उल हुसैन ने कहा है भारत को अंतरराष्ट्रीय कानूनों के प्रति अपनी जवाबदेही समझनी चाहिए.

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक़ म्यांमार की 90 प्रतिशत जनसंख्या बौद्ध है. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ यहां के रोहिंग्या मुसलमान दुनिया के सबसे पीड़ित समुदायों में से एक हैं. म्यांमार में कई पीढ़ियों से रहने के बावजूद उन्हें वहां का नागरिक नहीं माना जाता. वहां की सेना इस समुदाय का सफ़ाया करने के ऑपरेशन चलाती है. अगस्त के अंत में कुछ रोहिंग्या उग्रवादियों ने म्यांमार सेना की कुछ पोस्टों पर हमला कर दिया था. तब से हिंसा जारी है. बीते शनिवार को विद्रोहियों ने ‘मानवीय संकट’ का हवाला देकर कुछ समय के लिए युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, लेकिन म्यांमार सरकार ने इसे यह कहकर ठुकरा दिया कि वह आतंकवादियों से बात नहीं करती.

रोहिंग्या मुसलमानों के ख़िलाफ़ हो रही हिंसा पर म्यांमार की स्टेट काउंसलर आंग सान सू की को हर ओर से आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. शांति को लेकर संघर्ष करनेवाली दुनिया की कई हस्तियां उनसे अपील कर चुकी हैं कि वे इस हिंसा को रोकें. कुछ दिन पहले मलाला यूसुफ़ज़ई ने भी एक ट्वीट के ज़रिए सू की से अपील की थी. उन्होंने लिखा था, ‘मैं कई सालों से इस हिंसा की लगातार आलोचना कर रही हूं. मैं अब भी इंतज़ार कर रही हूं कि मेरी नोबेल पुरस्कार साथी आंग सान सू की भी ऐसा करें.’