जैसा कि अपेक्षित था. तमिलनाडु के सत्ताधारी दल एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के महासचिव (अंतरिम) पद से शशिकला नटराजन की छुट्‌टी हो गई है. यही नहीं हमेशा के लिए दिवंगत जयललिता को पार्टी प्रमुख बनाए रखने का फैसला भी कर लिया गया है. इससे भविष्य में शशिकला या किसी और के भी इस पद पर पहुंचने के सभी रास्ते हमेशा के लिए बंद हो गए हैं.

ख़बरों के मुताबिक मंगलवार को चेन्नई में पार्टी की साधारण सभा में यह फैसला किया गया. इसमें शशिकला के भतीजे टीटीवी दिनाकरन की भी उपमहासचिव के तौर पर नियुक्ति शून्य घोषित कर दी गई है. साथ ही शशिकला और दिनाकरन की ओर से अब तक की गई नियुक्तियों को भी रद्द कर दिया गया. उनके बजाय पूर्व में जयललिता ने विभिन्न पदों पर जिन लोगों को नियुक्त किया था वे ही पहले की तरह काम करते रहेंगे.

बैठक में यह भी फैसला हुआ कि पार्टी का काम अब 11 सदस्यीय समन्वय समिति देखेगी. इसके संयोजक उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम (ओपीएस) होंगे. जबकि मुख्यमंत्री ईके पलानिसामी (ईपीएस) सह-संयोजक होंगे. पार्टी महासचिव के सभी अधिकार समन्वय समिति के संयोजक और सह-संयोजक के पास रहेंगे. यानी ओपीएस-ईपीएस के पास. इस तरह सरकार के बाद अब पार्टी में भी ईपीएस-ओपीएस की जोड़ी की पकड़ कायम हो गई है.

इसके बाद अब कहा जा रहा है कि पार्टी प्रतिनिधि संभवत: बुधवार को चुनाव आयोग से मिलकर उसे इन फैसलों के बाबत बताएंगे. साथ ही पार्टी का चुनाव चिन्ह वापस आवंटित करने की मांग करेंगे. खबरों के मुताबिक साधारण सभा में जनरल काउंसिल के क़रीब 2,400 सदस्यों में 2,148 मौज़ूद थे. यानी करीब 90 फीसदी. हालांकि एनडीटीवी की मानें तो 10 फीसदी अनुपस्थित सदस्यों में करीब एक दर्जन वे विधायक भी थे जो शशिकला-दिनाकरन समर्थक हैं.

उधर अनुमान यह भी लगाया जा रहा है कि दिनाकरन इन फैसलों को अदालत में चुनौती दे सकते हैं. साथ ही पलानिसामी सरकार को गिराने की भी वे कोशिश कर सकते हैं. उन्होंने खुद इन फैसलों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए ऐसे संकेत भी दिए. मीडिया से बातचीत में दिनाकरन ने कहा, ‘अब मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि ये सरकार सत्ता से बेदखल कर दी जाए. सदन में जब भी मत परीक्षण होगा मेरे समर्थक विधायक इस सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे.’

दिनाकरन ने ओपीएस-ईपीएस पर आरोप लगाया कि उन्होंने राज्य की जनता को ही नहीं दिवंगत जयललिता और उनकी सहयोगी शशिकला को भी धोखा दिया है. साथ ही चुनौती दी कि अगर इन लोगों (ओपीएस-ईपीएस) को भरोसा है कि उनके पास बहुंमत का समर्थन है तो वे सरकार से इस्तीफा देकर फिर विधानसभा चुनाव कराकर देख लें. दिनाकरन के मुताबिक पलानिसामी की सरकार अब सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार पूरी तरह खो चुकी है.