जदयू के बागी नेताओं शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है. द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार राज्यसभा के सभापति वेंकैया नायडू ने शरद यादव और अली अनवर से उन्हें सदन से अयोग्य ठहराने की जदयू की याचिका पर अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है. राज्यसभा में जदयू के नेता रामचंद्र प्रसाद सिंह ने अपनी इस याचिका में कहा था कि दोनों नेताओं ने 27 अगस्त को पटना में राजद की रैली में शामिल होकर खुद ही पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है, इसलिए संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत उन्हें अयोग्य घोषित करने की जरूरत है. 10वीं अनुसूची में दल-बदल और इसके आधार पर सदस्यों को अयोग्य ठहराने के प्रावधान मौजूद हैं.

जदयू के दोनों बागी सांसदों को नोटिस मिलने के सात दिन के भीतर जवाब देना है. इन नेताओं ने जुलाई में महागठबंधन तोड़ने और भाजपा के सहयोग से बिहार में सरकार बनाने के नीतीश कुमार के फैसले की आलोचना की थी. इसके अलावा दोनों नेता राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की रैली में भी शामिल हुए थे. राज्यसभा में अली अनवर का कार्यकाल अगले साल मार्च में, जबकि शरद यादव का 2022 में समाप्त हो रहा है.

बिहार में महागठबंधन टूटने को जनादेश के साथ धोखा बताने वाले शरद यादव कई मौकों पर पार्टी से अलग होने का संकेत दे चुके हैं. पिछले दिनों उन्होंने ‘सरकारी जदयू’ और ‘असली जदयू’ जैसे पार्टी में दो खेमे होने और असली जदयू के अपने साथ होने का भी दावा किया था. इसके अलावा संवाद यात्रा के जरिए उन्होंने बिहार में जदयू कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात की थी. उधर, नीतीश कुमार ने कहा था कि शरद अपनी राह तय करने के लिए आजाद हैं.