सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और संविधान के जानकार पीपी राव का बुधवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. वे 84 वर्ष के थे. एक जुलाई 1933 को जन्मे पीपी राव ने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से एलएलबी और एलएलएम की डिग्री ली थी. उन्होंने 1961 में दिल्ली विश्वविद्यालय में कानून के शिक्षक के रूप में अपना करियर शुरू किया था. बार एंड बेंच के मुताबिक पीपी राव ने 1967 में दिल्ली बार एसोसिएशन में अपना पंजीकरण कराया था और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में काम करने लगे थे. इसी साल जुलाई में उन्होंने बतौर अधिवक्ता 50 साल पूरे किए थे.

पीपी राव ने 1992 में बाबरी मस्जिद गिराए जाने के बाद भाजपा शासित चार राज्यों (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश) में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले का अदालत में बचाव किया था. उन्होंने दलील दी थी कि संविधान में मौजूद धर्मनिरपेक्षता के विचार का उल्लंघन किसी राज्य सरकार को बर्खास्त किए जाने का पर्याप्त आधार है. इसके अलावा वे केशवानंद भारती, एसआर बोमई, उन्नीकृष्णन बनाम आंध्र प्रदेश, टीएमए पाई, पीए इनामदार जैसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक मामलों से भी जुड़े रहे.

पीपी राव को 1991 में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना गया था. इसके अलावा 2006 में उन्हें पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया. 2014 में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने लोकपाल चयन समिति में उन्हें न्यायिक सदस्य के रूप में नियुक्त किया था.