संयुक्त राष्ट्र ने म्यांमार के रोहिंग्या शरणार्थियों की मदद के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से राजनीतिक मतभेद भुलाकर आगे आने की अपील की है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने कहा है कि म्यांमार से पलायन कर रहे रोहिंग्या मुसलमानों की स्थिति चिंताजनक है. उनके मुताबिक, ‘जो खबरें आ रही हैं और जिन तस्वीरों को हम देख पा रहे हैं, वे दिल तोड़ने वाली हैं.’ स्टीफन दुजारिक ने ये बातें इस संकट में भारत जैसे क्षेत्रीय देशों की भूमिका से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहीं.

रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र ने तीन लाख रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए व्यवस्था की थी जो अब कम पड़ने लगी है. इस पर स्टीफन दुजारिक ने कहा है, ‘शरणार्थियों की संख्या का यह आंकड़ा कब का पार हो चुका है. हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ज्यादा अनुदान देने की अपील करते हैं.’ उन्होंने यह भी बताया कि बांग्लादेश सरकार ने नए शरणार्थियों के लिए शिविर बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र से सहायता मांगी है. स्टीफन दुजारिक का यह भी कहना था कि संयुक्त राष्ट्र संसाधनों की कमी की वजह से सभी जरूरतमंद शरणार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है.

रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार के बौद्ध बहुल रखाइन राज्य से ताल्लुक रखते हैं. पिछले महीने रोहिंग्या विद्रोहियों द्वारा पुलिस और सेना के कैंप पर हमले के बाद सुरक्षाबलों के जवाबी अभियान के चलते इनके पलायन में तेजी आई है. इस दौरान म्यांमार की सेना पर न केवल रोहिंग्या मुसलमानों के गांवों को जलाने, बल्कि उन्हें पलायन के लिए मजबूर करने के आरोप लगे हैं. म्यांमार 1948 में आजाद होने के बाद से रोहिंग्या मुसलमानों को अपना नागरिक मानने से इनकार करता आ रहा है.