नोटबंदी से पहले भी बैंक में संदिग्ध मोटी रकम जमा करने वालों पर आयकर विभाग शिकंजा कसने की तैयारी में है. इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक आयकर अधिकारियों ने वित्तीय वर्ष 2010-11 में इस तरह की रकम जमा करने वाले लोगों को एक नोटिस भेजकर उनसे जवाब देने को कहा है. घर ख़रीदनेवाले उन लोगों से भी जवाब मांगा गया है जिन्होंने कागजों पर इसकी कीमत प्रचलित अनुमान से कहीं कम दिखाई है. अगर विभाग को संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो संबंधित व्यक्तियों के टैक्स का हिसाब फिर से लगाया जा सकता है और उनसे बकाया टैक्स की वसूली हो सकती है.

एक वरिष्ठ आयकर अधिकारी ने बताया कि उपलब्ध जानकारी को ‘कम’ और ‘ज़्यादा’ जोखिम वाली दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है. ज़्यादा जोखिम वाले श्रेणी के मामलों को तुरंत देखना होगा. अधिकारी ने बताया कि मामलों को जल्दी निपटाने के लिए समयसीमा भी तय की जाएगी. विभाग ने लोगों और कंपनियों से उनके स्थायी अकाउंट नंबर और संबंधित वित्तीय वर्ष में आयकर रिटर्न को लेकर सवाल किए हैं. आयकर अधिनियम की धारा 147 और 148 के तहत अधिकारियों को टैक्स के लिए देय किसी भी आय के मूल्यांकन या पुनर्मूल्यांकन का अधिकार होता है.

संपत्ति के लेन-देन से संबंधित मामलों में अधिकारियों ने निर्धारित आय को घोषित मूल्य और ‘गाइडेंस’ वैल्यू के रूप में अलग कर लिया है. उनके मुताबिक इससे वास्तविक टैक्स और दिए गए टैक्स के बीच का अंतर पता चल पाएगा. माना जा रहा है कि इस नई कवायद से टैक्स में वृद्धि होगी और सरकार का राजस्व बढ़ेगा.