पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या उसी पिस्तौल से की गई जिससे दो साल पहले कन्नड़ बुद्धिजीवी एमएम कलबुर्गी की हत्या की गई थी. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गौरी लंकेश हत्याकांड की शुरुआती फ़ॉरेंसिक जांच में यह बात सामने आई है. गौरी की हत्या में इस्तेमाल हुई पिस्तौल के गोलियों और कारतूस की जांच करने पर पता चला कि इन्हें 7.65-एमएम की पिस्तौल से चलाया गया था. कलबुर्गी की हत्या में भी इसी पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था.

रिपोर्ट के मुताबिक यह जानकारी मामले की जांच कर रही एसआईटी को दे दी गई है. इससे पहले 12 सितंबर को खबर आई थी कि इन दोनों हत्याओं के तार आपस में जुड़ते हैं. चार सितंबर को गौरी लंकेश की अनजान हमलावरों ने उनके घर में ही हत्या कर दी थी. 30 अगस्त, 2015 को एमएम कलबुर्गी की हत्या भी कर्नाटक के धारवाड़ स्थित उनके घर में की गई थी.

जांचकर्ताओं ने गौरी लंकेश और कलबुर्गी की हत्याओं में इस्तेमाल हुए गोलियों और कारतूसों की तुलना की थी. सूत्रों के मुताबिक इससे पता चला कि दोनों मामलों में एक ही पिस्तौल का इस्तेमाल किया गया था. एक अधिकारी ने बताया कि इससे संकेत मिलता है कि इन हत्याओं के पीछे एक ही समूह या संगठन का हाथ हो सकता है.

फ़ॉरेंसिक जांच में दोनों हत्याओं की तुलना करने के बाद इसे गोविंद पंसारे की हत्या से जोड़कर देखने पर संकेत मिलता है कि इन तीनों हत्याओं में एक ही बंदूक का इस्तेमाल किया गया है. महाराष्ट्र के तर्कवादी गोविंद पंसारे की 16 फ़रवरी, 2015 को हत्या कर दी गई थी. 2015 में कलबुर्गी और पंसारे की हत्याओं की जांच के दौरान सीआईडी ने दोनों मामलों से जुड़े सबूतों का विश्लेषण किया था. वहां भी गोलियों और कारतूसों में समानता पाई गई थी.

गोविंद पंसारे की हत्या में इस्तेमाल हुई गोलियों और कारतूसों की जांच की तुलना नरेंद्र दाभोलकर की हत्या के मामले से भी की गई थी. पता चला कि उनकी हत्या में इस्तेमाल की गई पिस्तौल भी वही है. 20 अगस्त, 2013 को पुणे में तर्कवादी नरेंद्र दाभोलकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. साफ है कि इन चारों हत्याओं में चेहरे भले ही अलग-अलग हों, पिस्तौल एक ही है.