आने वाले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी अपने 282 में से क़रीब 100 सांसदों का टिकट काट सकती है. सूत्रों के हवाले से डीएनए में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक ये सब वे सांसद हो सकते हैं जो उम्र और प्रदर्शन के मानकों पर खरे नहीं पाए जाएंगे. बताते हैं कि पार्टी में शीर्ष स्तर पर इस तरह की आकलन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, ‘चुनाव में उम्मीदवारों के लिए सबसे बड़ी कसौटी होगी उनके जीतने की संभावना. ज़ाहिर तौर पर मौज़ूदा सांसदों का संसद और संसदीय क्षेत्रों में अब तक का प्रदर्शन उनकी इस संभावना को मज़बूती देगा या उसे कमज़ोर करेगा. लिहाज़ा उनका प्रदर्शन दूसरी बड़ी कसौटी होगी. खास तौर पर मौज़ूदा सांसदों को फिर टिकट दिए जाने के मामले में. क्योंकि पार्टी अब सिर्फ ऐसे लोगों को मौका देने के मूड में है जो प्रदर्शन कर सकें.’

सूत्र बताते हैं, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने मंत्रिमंडल के लिए उपयुक्त प्रतिभावान मंत्री ढूंढने में जिस तरह मशक्कत करनी पड़ी उससे भी यही राय बनी है कि अगली बार उन्हीं को तवज़्ज़ो दी जाए जो बड़ी ज़िम्मेदारी निभाने में सक्षम हों. और मौज़ूदा सांसदों के मामले में उनकी क्षमताओं का आकलन ज़ाहिर तौर पर इस बार के उनके प्रदर्शन के आधार पर ही होगा. ऐसे में इस मापदंड का असर 30-40 फीसदी सांसदों पर पड़ना करीब-करीब तय है.’

ग़ौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में महज़ 15 कैबिनेट मंत्री ऐसे हैं जो लोकसभा चुनाव जीतकर आए हैं. जबकि 18 मंत्री राज्य सभा के सदस्य हैं. इस महीने के शुरू में हुए मंत्रिमंडल विस्तार में प्रधानमंत्री ने दो ऐसे पूर्व अफसरों- पूर्व राजनयिक हरदीप सिंह पुरी और केरल के पूर्व आईएएस अलफॉन्स कन्नथनम को मंत्री बनाया जो किसी सदन के सदस्य नहीं हैं. इससे यह संकेत गया कि पार्टी के भीतर ‘प्रतिभाओं की कमी’ हो गई है.

लिहाज़ा अगली बार ऐसी असहज स्थितियों का सामना न करना पड़े इसके लिए अभी से तैयारी शुरू की गई है. इसी तैयारी के तहत राज्यों में पार्टी के प्रभारी महासचिवों को यह ज़िम्मेदारी दी गई है कि वे मौज़ूदा सांसदों के प्रदर्शन का आकलन कर पार्टी अध्यक्ष को रिपोर्ट दें. एक बार अच्छा-बुरा प्रदर्शन करने वाले सांसदों की सूची हाथ में आ गई तो पार्टी नेतृत्व को अन्य योग्य उम्मीदवारों की तलाश और उनके बारे में समय से फैसला करने में आसानी हो जाएगी.’