म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रही बर्बर हिंसा की चपेट में वहां के हिंदू भी आ रहे हैं. हालात ये हैं कि अब वे भी देश से भागने को मजबूर हैं. द टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट में म्यांमार छोड़कर बांग्लादेश में शरण लेनेवाले ऐसे कई बेघर हिंदुओं की कहानियां हैं. वहीं, द हिंदू के मुताबिक़ गुरुवार को भारत ने बांग्लादेश में रह रहे म्यांमार शरणार्थियों के लिए राहत का सामान का भेजा है. बांग्लादेश सरकार द्वारा वहां के हालात बताए जाने के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन इंसानियत’ के तहत 53 टन राहत सामग्री भेजी है.

रोहिंग्या मुसलमानों के अलावा म्यांमार के हिंदुओं के साथ हुई हिंसा के अनुभव झकझोर देनेवाले हैं. अखीरा धर एक म्यांमारी शरणार्थी हैं. वे बताती हैं कि उनके पति और ससुरालवालों को बेरहमी से मार दिया गया. अखीरा के मुताबिक कुछ नक़ाबपोश बंदूकें लेकर उनके घर आए और सब कुछ लूटने के बाद चाकुओं से सबके सिर काट दिए. उन्हें इस बात से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ा कि वे रोहिंग्या नहीं बल्कि हिंदू अल्पसंख्यक हैं. अखीरा की बातों से साफ है कि रखाइन प्रांत में हो रही हिंसा धार्मिक सीमाओं से आगे निकल गई है.

एक और हिंदू शरणार्थी रीखा धर की कहानी बताती है कि म्यांमार में केवल सेना ही हिंसा नहीं कर रही है. रीखा के पति की ज्वैलरी की दुकान थी. उन्हें भी कुछ नक़ाबपोश जबरन उठाकर ले गए. उन्होंने परिवार के बच्चों को जान से मारने की धमकी दी तो रीखा के पति को बताना पड़ा कि उन्होंने ज्वैलरी कहां छिपा रखी है. रीखा के मुताबिक यह जानने के बाद हमलावरों ने उनका गला रेत दिया. रीखा के अलावा हिंसा से बच निकले कई लोगों का कहना है कि ये नक़ाबपोश सेना के लोग नहीं थे.

उधर, विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा है कि बांग्लादेश में शरणार्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारत ने बांग्लादेश की और मदद करने का फ़ैसला किया है. बांग्लादेश के उच्चायुक्त सैयद मुअज़्ज़म अली ने भारत के विदेश सचिव एस जयशंकर से मुलाक़ात कर उनसे रोहिंग्या मुद्दे पर विस्तार से बात की थी. ‘ऑपरेशन इंसानियत’ के तहत शरणार्थियों के लिए भेजे गए राहत के सामान में चावल, दालें, चीनी, खाना पकाने का तेल, चाय, नूडल, बिस्किट और मच्छरों से बचानेवाली जालियां शामिल हैं. भारत कुल सात हज़ार टन का राहत सामान भेजेगा.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ अब तक तीन लाख 79 हज़ार रोहिंग्या मुसलमान म्यांमार से बांग्लादेश आ चुके हैं. यहां 25 अगस्त को रोहिंग्या उग्रवादियों ने सेना की पोस्टों पर हमला कर दिया था. तब से हालात नियंत्रण से बाहर हैं. शरणार्थियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और म्यांमार पर दबाव बनाए.