भारत ने म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों के पलायन के मुद्दे पर बांग्लादेश के रुख का समर्थन किया है. भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने गुरुवार को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बात की और रोहिंग्या संकट पर भारत के रुख के बारे में बताया. बांग्लादेश, म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों का उत्पीड़न रोकने और उन्हें वापस लेने की मांग कर रहा है. शेख हसीना के उप प्रेस सचिव नजरुल इस्लाम के मुताबिक इस बातचीत में भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने जोर देकर कहा कि भारत रोहिंग्या मुसलमानों का उत्पीड़न रोकने के अलावा उन्हें वापस लेने के लिए भी म्यांमार पर द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने रोहिंग्या संकट को वैश्विक मुद्दा बताया है. उन्होंने कहा है, ‘रोहिंग्या समस्या अब अकेले बांग्लादेश का मामला नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्रीय मुद्दा अब वैश्विक मुद्दे में बदल गया है.’ म्यांमार से पलायन करने वाले लगभग 3.89 लाख रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश के सीमावर्ती इलाकों कॉक्स बाजार और टेकनाफ सीमा में शरण ली है. यहां इन्हें भोजन, स्वच्छ पानी, दवाओं और शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र और अन्य देशों के अलावा भारत ने भी गुरुवार को मानवीय सहायता बांग्लादेश भेजी है.

इस बीच बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वे संयुक्त राष्ट्र आम सभा के 72वें सत्र में रोहिंग्या संकट के समाधान के लिए कोफी अन्नान आयोग की सिफारिशों को लागू करने का प्रस्ताव रखेंगी. संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान की अध्यक्षता वाले आयोग ने म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों का अलगाव खत्म करने, उनकी नागरिकताविहीन स्थिति समाप्त करने, मानवाधिकार उल्लंघन पर जवाबदेही तय करने और देश के भीतर उनकी आवाजाही पर पाबंदी हटाने जैसी कई सिफारिशें की थीं.