भारत में अवैध रूप से रह रहे रोहिंग्या मुसलमानों को वापस म्यांमार भेजने के मामले में केंद्र सरकार 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट में हलफ़नामा दायर करेगी. न्यूज़ एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह बात कही. रोहिंग्या शरणार्थियों को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा बताते हुए राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि सरकार अवैध विदेशी प्रवासियों से सख़्ती से निपटेगी.

इस हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट से अपील की गई है कि वह रोहिंग्या मुसलमानों के निर्वासन को लेकर सरकार के क़दम पर रोक न लगाए. बुधवार को गृह राज्यमंत्री हंसराज अहीर ने भी कहा था कि अगर रोहिंग्या भारत में स्थायी रूप से रहते हैं तो क़ानून-व्यवस्था की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा.

इस बीच आज दो रोहिंग्या शरणार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि वह केंद्र सरकार को निर्देश दे कि वह उन्हें म्यांमार न भेजे. कोर्ट से अपील करने वाले मोहम्मद सलीमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर ने कहा है कि वापस म्यांमार भेजे जाने के बाद निश्चित ही उन्हें मार दिया जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़ हिंदुस्तान में करीब 40 हजार रोहिंग्या शरणार्थी रह रहे हैं. भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या इससे कई गुना ज्यादा - करीब साढ़े तीन लाख है. शरणार्थियों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए बांग्लादेश ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह इस मामले में हस्तक्षेप करे और म्यांमार पर दबाव बनाए.