केंद्र सरकार पैन कार्ड के बाद अब ड्राइविंग लाइसेंस को भी आधार कार्ड से जोड़ने की तैयारी में है. एएनआई के मुताबिक ‘डिजिटल हरियाणा शिखर सम्मेलन 2017’ में केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना था कि आधार एक भौतिक नहीं बल्कि डिजिटल पहचान है और एक डिजिटल पहचान ही भौतिक पहचान की पुष्टि करती है. उन्होंने कहा, ‘हम ड्राइविंग लाइसेंस को आधार से जोड़ने की योजना बना रहे हैं. इस बारे में मेरी नितिन गडकरी से बात हुई है.’ हाल ही में केंद्र सरकार ने मोबाइल के सिम कार्डों को भी फरवरी 2018 तक आधार से जोड़ने के आदेश दिये थे. इससे पहले सरकार पैन कार्ड को भी आधार से जोड़ने का आदेश जारी कर चुकी है.

इस कार्यक्रम में डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने की बात करते हुए रविशंकर प्रसाद ने इसे ‘गुड गवर्नेंस’ बताया. उन्होंने कहा कि इससे कामों का जल्दी होना और ग़रीबों का कल्याण सुनिश्चित होते हैं. भारत की आईटी इंडस्ट्री की प्रशंसा करते हुए रविशंकर ने कहा, ‘डिजिटल गवर्नेंस ईमानदार, पारदर्शी और प्रभावशाली व्यवस्था है. भारत को इसका नेतृत्व करना चाहिए.’ रविशंकर ने भारत के डिजिटल सोसायटी का नेतृत्व करने की बात भी कही. उनका कहना था कि तकनीक को उचित क़ीमतों पर लोगों तक पहुंचाया जाना चाहिए.

वहीं, डेटा संरक्षण क़ानून बनाए जाने के मुद्दे पर इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है इस साल के अंत तक डेटा संरक्षण क़ानून आना चाहिए. आप एक बुनियादी महत्व के मुद्दे पर काम कर रहे हैं और मैंने ख़ुद आग्रह किया है कि स्टेकहोल्डरों के बीच इस पर व्यापक बहस होनी चाहिए. निजता और नवीनता दोनों की बात करने वालों को सुना जाना चाहिए. मेरी राय है कि भारत का डेटा संरक्षण क़ानून एक मील का पत्थर बनना चाहिए.’ भारत में आधार से जुड़े डाटा को लेकर काफी समय से बहस चल रही है कि यह सुरक्षित नहीं है और इसका दुरुपयोग किया जा सकता है. डाटा संरक्षण कानून की जरूरत भी इसीलिए महसूस की जा रही है.