पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर्स प्रकरण में 28 जुलाई के अपने फैसले पर फिर से विचार करने से इनकार कर दिया है. द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ, उनके बच्चों और पूर्व वित्त मंत्री इशाक डार ने शीर्ष अदालत में पुनर्विचार याचिका लगाई थी. शुक्रवार को पांच जजों की बेंच ने इन सभी पुनर्विचार याचिकाओं को खारिज कर दिया. अदालत के इस फैसले से नवाज शरीफ न केवल संसद की सदस्यता के लिए अयोग्य बने रहेंगे, बल्कि उन्हें और उनके बच्चों को भ्रष्टाचार के मामलों में जांच का भी सामना करना पड़ेगा.

स्थानीय अखबार डॉन के मुताबिक गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ से कहा था कि उन्हें अदालत पर भरोसा रखना चाहिए, जहां से उन्हें पहले राहत मिल चुकी है. जस्टिस आसिफ सईद खोसा ने यह भी कहा था, ‘अपने खिलाफ महज एक फैसला आने से आपको इतना परेशान होने की जरूरत नहीं है.’

पनामा पेपर्स लीक्स मामले में 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद के लिए अयोग्य करार दिया था और इसके बाद नवाज शरीफ को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था. इसके अलावा मामले की जांच के लिए गठित संयुक्त जांच दल (जेआईटी) द्वारा जुटाए गए सबूतों को छह हफ्ते के भीतर उपयुक्त अदालत को भेजने का आदेश दिया था. पाकिस्तान की शीर्ष अदालत ने इसके साथ नवाज शरीफ और उनके बच्चों के खिलाफ मनी लॉन्डरिंग, बेनामी संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामलों को दोबारा खोलने का भी आदेश दिया है.