अार्थिक मोर्चे पर नरेंद्र मोदी सरकार के लिए एक और बुरी खबर आई है. मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश का चालू खाते का घाटा बढ़कर जीडीपी का 2.4 फीसदी हो गया है. यह पिछले चार साल में सबसे ज्यादा है. साल भर पहले की समान अवधि में यह केवल 0.1 फीसदी था. चालू खाते का घाटा वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात की तुलना में होने वाले ज्यादा आयात को कहा जाता है.

भारतीय रिजर्व बैंक के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 की अप्रैल से जून की तिमाही में डॉलर में चालू खाते का घाटा 14.3 अरब डॉलर रहा. वहीं साल भर पहले इसी अवधि में यह महज 40 करोड़ डॉलर था. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के अनुसार ऐसा जीएसटी लागू होने के पहले सोने के आयात में हुई तेज वृद्धि के चलते हुआ. हालांकि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के मामले में सरकार के लिए अच्छी खबर है. मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में एफडीआई लगभग दोगुना होकर 7.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

केंद्रीय बैंक के अनुसार अब निर्यात में गिरावट के बजाय वृद्धि का सिलसिला जारी है. सरकार के लिए यह भी अच्छी खबर है. इस वजह से अगस्त में सामानों का निर्यात पिछले साल इसी महीने की तुलना में 10.30 फीसदी बढ़कर 24 अरब डॉलर तक पहुंच गया. हालांकि अगस्त में व्यापार घाटे यानी वस्तुओं के निर्यात की तुलना में अधिक आयात बढ़कर 11.6 अरब डॉलर हो गया.

बीती तिमाही में सेवा क्षेत्र की कुल प्राप्ति यानी आयात की तुलना में निर्यात में भी 15.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई. ऐसा परिवहन, निर्माण और अन्य व्यापार गतिविधियों में वृद्धि के चलते हुआ है. वहीं विदेशों में काम करने वाले भारतीयों द्वारा देश में भेजे जाने वाले धन के चलते देश में आने वाले कुल निजी धन में पांच फीसदी से ज्यादा वृद्धि हुई है. वित्त वर्ष 2017-18 की पहली तिमाही में यह राशि 16 अरब डॉलर से ज्यादा रही.