केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सभी सुरक्षा एजेंसियों को एकीकृत कमान के तहत लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है. सूत्रों के हवाले से द न्यू इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर की मानें तो इस कमान का नाम आईएलईसी (एकीकृत विधि प्रवर्तन केंद्र) हो सकता है. ख़बर के मुताबिक जल्द से जल्द आईएलईसी की स्थापना के बारे में प्रस्ताव तैयार करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने एक पांच सदस्यीय समिति भी गठित कर दी है. इस समिति में विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अफसर बतौर सदस्य शामिल किए गए हैं.

सूत्रों की मानें तो आईएलईसी का स्वरूप वैसा ही हो सकता है जैसा यूरोपीय संघ में फ्रंटेक्स और अमेरिका में होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट का है. आईएलईसी में सभी सुरक्षा एजेंसियों सहित केंद्र और राज्यों के भी प्रतिनिधि शामिल होंगे. यह एजेंसी सीमा पार से होने वाले अपराधों की जांच-पड़ताल और उसके बाद उन पर आगे ज़रूरी कार्रवाई के मामले देखेगी. ख़ास तौर पर सीमा पार आतंकवाद, हथियारों, जाली मुद्रा, दुर्लभ प्रजातियों के जीवों तथा अन्य बहुमूल्य वस्तुओं की तस्करी और इसी तरह के अन्य अंतर्राष्ट्रीय अपराधों के मामलों में.

सूत्रों के मुताबिक सरकार को आईएलईसी संबंधी प्रस्ताव एक विस्तृत रिपोर्ट की शक्ल में कुछ समय पहले मिला था. यह रिपोर्ट सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिरीक्षक (आईजी) संतोष मेहरा ने तैयार की थी. इस रिपोर्ट में सीमा पार से होने वाले आपराधिक मामलों की तेज सुनवाई करने के लिए अलग फास्ट-ट्रैक अदालतें स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया था, जिस पर अभी फैसला नहीं हुआ है. वैसे आईएलईसी की स्थापना भी केंद्र-राज्य समन्वय की भी बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है क्योंकि यह मसला राज्यों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा.

ग़ौरतलब है कि सितंबर 2001 की 11 तारीख़ को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले के बाद अमेरिका ने भी इसी तरह की कवायद की थी. उस घटना के बाद वहां 22 सुरक्षा एजेंसियों को मिलाकर होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट का गठन किया गया था. सरकार के स्तर पर यह तब का सबसे बड़ा विभागीय पुनर्गठन था.