भारत ने इस्लामिक देशों के संगठन ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) से साफ़ तौर पर कहा है कि उसका भारत के अंदरूनी मामलों में न बोलना बेहतर होगा. खबरों के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव सुमित सेठ ने कहा, ‘ओआईसी को भारत के अंदरूनी मामलों को सुनने का कोई अधिकार नहीं है. हम दृढ़ता से ओआईसी को भविष्य में ऐसी टिप्पणी करने से बचने की सलाह देते हैं.’ सेठ ने कहा कि जम्मू और कश्मीर को लेकर अपने बयान में ओआईसी ने तथ्यात्मक रूप से ग़लत और भ्रामक बयान दिया है जिसे भारत सीधे तौर पर खारिज करता है. उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अविभाज्य और अभिन्न अंग है.

ओआईसी 57 इस्लामिक देशों का संगठन है जिनमें पाकिस्तान भी शामिल है. यह ख़ुद को ‘मुस्लिम जगत की सामूहिक आवाज़’ बताता है. बीते सालों में कश्मीर को लेकर इसने कई बार टिप्पणियां की हैं. जुलाई में संगठन ने ‘कश्मीर में मानवाधिकार के उल्लंघनों’ की बात कही थी. ओआईसी ने कहा था कि कश्मीर विवाद से क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए ख़तरा पैदा हो गया है. उस समय पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के सलाहकार सरताज अज़ीज़ ने सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में हिज़्बुल कमांडर बुरहान वानी की मौत का ज़िक्र करते हुए कहा था कि भारत कश्मीर में अत्याचार कर रहा है. इसी का जवाब देते हुए भारत के विदेश मंत्रालय ने ओआईसी को सलाह दी कि वह इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचे.

इससे पहले भी ओआईसी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन करता रहा है. अप्रैल में हुई एक बैठक में उसने कहा था कि कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर भारत पर दबाव बनाए जाने की ज़रूरत है. पीटीआई के हवाले से टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने बताया कि मई में ओआईसी की एक मीटिंग में पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सचिव एंटोनियो गुटेरेस के सामने कश्मीर का मुद्दा उठाया था. इससे एक महीना पहले संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी मिशन के मंत्री अनवर मसूद ने भी संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाया. इसके जवाब में भारत के एस श्रीनिवास ने भारत की ओर से आपत्ति जताई थी. उन्होंने कहा था, ‘यह एक द्विपक्षीय मामला है जिसे यहां नहीं लाया जाना चाहिए.’ श्रीनिवास ने साफ़ कहा कि कश्मीर मुद्दे का इस मंच से कोई संबंध नहीं है.