भारतीय क्रिकेट टीम ने पिछले दिनों श्रीलंका के खिलाफ अब तक का अपना सबसे बेहतरीन प्रदर्शन किया. उसने टेस्ट, वनडे और टी20 मिलाकर कुल नौ मैच खेले और सभी में जीत हासिल की. हालांकि, श्रीलंका की जिस टीम से उसका मुकाबला था वह अब तक की सबसे कमजोर टीम मानी जा रही है.

लेकिन, श्रीलंका जैसी आठवें नंबर की टीम से खेलने के बाद अब भारत का मुकाबला विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया से है. वर्तमान समय में भले ही ऑस्ट्रेलिया को क्रिकेट की सबसे मजबूत टीम न माना जा रहा हो लेकिन छोटे प्रारूप में अभी भी इस टीम से आगे केवल दक्षिण अफ्रीका ही नजर आती है. यही कारण है कि क्रिकेट जानकार विश्व कप से पहले ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हो रही इस सीरीज को भारतीय टीम के लिए अपनी क्षमताओं को परखने का सबसे बेहतरीन मौका मान रहे हैं.

पाकिस्तान के बाद ऑस्ट्रेलिया सबसे बड़ा प्रतिद्वंदी

क्रिकेट में अगर भारत के सबसे बड़े प्रतिद्वंदियों को देखें तो पाकिस्तान का नाम सबसे ऊपर आता है. लेकिन, 2008 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर हुए ‘मंकी गेट कांड’ के बाद से ऑस्ट्रेलियाई टीम पाकिस्तान के बाद भारत की सबसे बड़ी प्रतिद्वंदी बनकर सामने आई है. दोनों के बीच इसी साल हुई टेस्ट सीरीज में तो प्रतिद्वंदिता एक अलग स्तर पर पहुंच गई थी. आलम यह था कि सीरीज खत्म होने बाद भारतीय कप्तान विराट कोहली ने यह तक कह दिया था कि अब ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को वे अपना दोस्त नहीं मानते.

कट्टर प्रतिद्वंदी होने के अलावा एक वजह और भी ऐसी है जिसके कारण दोनों ही टीमें इस सीरीज के हर मैच को जीतने के लिए अपना पूरा दम लगाएंगी. दरअसल, दोनों ही टीमों के पास यह सीरीज जीतकर वनडे में नंबर एक टीम बनने का मौका है. इस समय वनडे में दक्षिण अफ्रीका नंबर एक, ऑस्ट्रेलिया नंबर दो और भारत नंबर तीन पर है. अगर, भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया को 5-0 से हराती है तो वह नंबर एक पर पहुंच जाएगी. जबकि, ऑस्ट्रेलिया 4-1 से सीरीज जीतने पर ऐसा कर सकती है.

ऑस्ट्रेलिया की कमजोरी और मजबूती

पिछले करीब पांच सालों से देखें तो ऑस्ट्रेलियाई टीम जब भी भारत आती है तो अपने उन खिलाड़ियों पर दांव लगाती है जो आईपीएल का हिस्सा बने हुए हैं. इसका सबसे बड़ा कारण इन खिलाड़ियों का भारतीय पिचों को बेहतर तरीके से जानना है. एडम जम्पा, स्टीवन स्मिथ, डेविड वार्नर, ग्लेन मैक्सवेल और जेम्स फाकनर को भारतीय पिचें किस कदर रास आती हैं यह किसी से नहीं छिपा है.

इस बार भी भारत आई ऑस्ट्रेलिया की 15 सदस्यीय टीम में 11 खिलाड़ी ऐसे हैं जो आईपीएल का हिस्सा बने हुए हैं. इसे भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी समस्या की तरह भी माना जाता है. पिछले दिनों भारतीय टीम के उपकप्तान रोहित शर्मा ने भी इसे एक बड़ी समस्या माना था. हालांकि, भारत के लिए सबसे ज्यादा राहत की बात यह है कि इस समय तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क और जोश हेजलबुड ऑस्ट्रेलियाई टीम का हिस्सा नहीं हैं. इन दोनों गेंदबाजों का न होना ऑस्ट्रेलियाई टीम की सबसे बड़ी कमजोरी माना जा रहा है. साथ ही दो दिन पहले ही सलामी बल्लेबाज एरोन फिंच के चोटिल होने से ऑस्ट्रेलियाई टीम की मुसीबत और भी बढ़ गई है.

भारतीय टीम की कमजोरी और मजबूती

पिछले एक साल से यानी विराट कोहली के कप्तान बनने के बाद से भारतीय टीम टेस्ट के साथ-साथ वनडे में भी अच्छा प्रदर्शन कर रही है. पिछले एक साल में उसने पांच द्विपक्षीय वनडे सीरीज खेली हैं जिनमें से सभी में उसने जीत हासिल की है. लेकिन, उसने इसमें से कोई भी सीरीज अपने से बेहतर आंकी जा रही टीमें दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ नहीं खेली है. यही कारण है कि विश्व कप की तैयारी में लगी भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ कैसा खेलती है इस पर सभी की निगाहें लगी हैं.

भारतीय टीम के एक साल के प्रदर्शन के लिहाज से इस समय वह बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में ही कहीं बेहतर नजर आ रही है. रोहित शर्मा, शिखर धवन और विराट कोहली लगभग हर मैच में बेहतर कर रहे हैं. मध्य और निचले क्रम पर केदार जाधव, महेंद्र सिंह धोनी और हार्दिक पांड्या के होने से टीम खासी मजबूत नजर आती है. हालांकि, शिखर धवन शुरुआती तीन मैचों में टीम के साथ नहीं हैं जो भारतीय टीम को खल सकता है.

गेंदबाजी की बात करें तो भले ही कुछ जानकार ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रविचंद्रन अश्विन की कामयाबी को देखते हुए उनके न होने को एक कमजोरी मान रहे हों. लेकिन, यजुवेंद्र चहल, कुलदीप यादव और रविंद्र जडेजा के प्रदर्शन को देखते हुए माना जा रहा है कि ये अश्विन की कमी महसूस नहीं होने देंगे. मैच से पहले मीडिया से बातचीत में स्टीवन स्मिथ ने भी कहा था कि भारत के युवा स्पिनर ही उनकी सबसे बड़ी चिंता हैं, खासकर चाइना मैन गेंदबाज कुलदीप यादव.

क्यों भारतीय खिलाड़ियों के लिए यह सीरीज अहम है

कई मौकों भारतीय टीम के कोच और कप्तान कह चुके हैं कि वे इस समय विश्व कप के लिए सबसे बेहतर टीम की तलाश में लगे हुए हैं. इस समय उनके लिए हार-जीत से ज्यादा खिलाड़ियों का अलग-अलग प्रदर्शन मायने रखता है. वे इस बात पर ध्यान दे रहे हैं कि कौन सा खिलाड़ी किस क्रम पर सबसे बेहतर खेल रहा है और इसीलिए नए-नए खिलाड़ियों को मौका दिया जा रहा है. ये लोग यह भी संकेत दे चुके हैं कि कोहली और धोनी जैसे दो-तीन खिलाड़ियों को छोड़कर विश्व कप के लिए किसी और का नाम अभी पक्का न समझा जाए.

साफ़ शब्दों में कहें तो टीम प्रबंधन ऐसा कहकर हार्दिक पांड्या, केदार जाधव, मनीष पाण्डेय और नई स्पिन तिकड़ी को संदेश दे रहा है कि उन्हें मैदान पर अभी और पसीना बहाने की जरूरत है. टीम प्रबंधन का यह संदेश सही भी नजर आता है क्योंकि पिछले दो सालों में एक दो मैचों को छोड़कर इन सभी ने कमजोर टीमों के खिलाफ ही सीरीजें खेली हैं या अच्छा प्रदर्शन किया है. जानकारों की मानें तो इन्हीं कारणों से एक आम सीरीज की तरह नजर आने वाली भारत और ऑस्ट्रेलिया की यह सीरीज काफी खास नजर आने लगी है.