विदेश में काली कमाई जमा करने के आरोपों की वज़ह से प्रधानमंत्री पद छोड़ने को मज़बूर हुए नवाज़ शरीफ की राजनीतिक विरासत फिलहाल उनकी पत्नी कुलसुम संभालेंगी. हालांकि इसके पहले जब सुप्रीम कोर्ट ने नवाज़ को नेशनल असेंबली की सदस्यता से अयोग्य घोषित किया था तो माना जा रहा था कि उनके भाई और पंजाब के मुख्यमंत्री शाहबाज़ उनकी जगह लेंगे. उस वक्त अटकलें ये भी लगाई गईं थीं कि नवाज़ की लाहौर सीट से ही उपचुनाव जीतने के बाद शाहबाज़ प्रधानमंत्री पद भी संभाल सकते हैं. लेकिन फिर आगे स्थितियां बदल गईं.

बहरहाल अब नवाज़ की सीट से उनकी पत्नी कुलसुम ने जीत हासिल की है. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक उपचुनाव का नतीज़ा अभी औपचारिक तौर पर घोषित नहीं हुआ है. लेकिन यह ख़ुलासा हो चुका है कि कुलसुम को 53.5 फीसदी वोट मिले हैं. हालांकि 2013 में नवाज़ इस सीट से 61 फीसदी वोट लेकर जीते थे. सो हिसाब से कुलसुम ने करीब आठ फीसदी कम वोट के अंतर से जीत हासिल की है. लेकिन फिर भी उनकी जीत मायने रखती है.

इसके दो प्रमुख कारण हैं. पहला- पूरे प्रचार अभियान के दौरान कुलसुम एक बार भी मैदान में नज़र नहीं आईं. प्रचार की कमान पूरी तरह उनकी बेटी मरियम नवाज़ ने संभाली. ख़बराें के मुताबिक कुलसुम का ब्रिटेन में इलाज चल रहा है. वे इस वक्त भी वहीं हैं. दूसरा कारण- जैसा कि मरियम ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से कहा, ‘यह सामान्य जीत नहीं है. आपने (कार्यकर्ताओं ने) न सिर्फ उन लोगों को हराया है जो सामने थे. बल्कि उनको भी शिकस्त दी है जो पर्दे के पीछे से खेल रहे थे.’ माना जा रहा है कि मरियम का इशारा पाकिस्तानी सेना की तरफ था.

वैसे इस बाबत सेना की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ग़ौरतलब है कि लाहौर सीट और पाकिस्तान के सबसे बड़े पंजाब प्रांत में 1980 के दशक से ही नवाज़ और उनके परिवार की सियासत का बोलबाला है. इस इलाके में नवाज़ या उनकी पार्टी- पीएमएल-एन (पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़) के उम्मीदवारों को भी हराना विपक्षी दलों के लिए चुनौतीपूर्ण रहा है. इस बार भी कुलसुम के ख़िलाफ क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान की पार्टी- पीटीआई (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ) ने वोट प्रतिशत में इज़ाफा तो किया लेकिन उसे जीत नसीब नहीं हुई.