ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले मैच में कॉमेंट्री के दौरान पूर्व भारतीय खिलाड़ी आकाश चोपड़ा का कहना था कि ‘सेल्फलैस’ (निस्वार्थ) जैसे शब्द भी चमक जाते हैं जब वे महेंद्र सिंह धोनी के साथ जोड़े जाते हैं. आकाश के मुताबिक उन्होंने धोनी से बड़ा ‘सेल्फलैस’ यानी क्रिकेट के लिए समर्पित खिलाड़ी नहीं देखा है.

महेंद्र सिंह धोनी को करीब से जानने वाले कुछ लोग बताते हैं कि जब-जब धोनी ने अपने करियर को लेकर बड़े निर्णय लिए तो उन्होंने उसके पीछे की वजहों का ज्यादा जिक्र नहीं किया. इसी कारण लोग इन फैसलों का गलत मतलब भी निकलते रहे. इनके मुताबिक वे जब धोनी से इस बारे में बात करते हैं तो वे बस यही कहते हैं कि समय के साथ लोग खुद समझ जाएंगे कि फैसलों की वजह क्या थी.

अब हम आकाश चोपड़ा के बयान पर वापस लौटें तो समझ आता है कि धोनी ने पहले टेस्ट क्रिकेट से अचानक संन्यास क्यों लिया और फिर वनडे और टी20 की कप्तानी क्यों छोड़ी. शायद इन फैसलों की वजह क्रिकेट के प्रति उनका समर्पण ही है. ऐसा न होता तो आज वे कप्तान न रहते हुए भी टीम को जिताने के लिए कप्तान जैसी ही मशक्कत करते मैदान पर नहीं दिखते. यह बात ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चल रही सीरीज के पहले मैच से बखूबी साबित होती है.

इस मैच के दौरान जब बारिश हुई और उसके बाद ऑस्ट्रेलिया को 21 ओवर में 164 रन का स्कोर मिला तो अधिकतर जानकार इस मैच में ऑस्ट्रेलिया का पलड़ा भारी बता रहे थे. माना जा रहा था बारिश के बाद वनडे से टी20 बन गए इस मैच में ऑस्ट्रेलिया के जीतने की संभावना 70 और भारत की 30 फीसदी ही रह गई है.

इसके बाद ऑस्ट्रेलिया बल्लेबाजी करने उतरी तो पूरे खेल के दौरान देखा गया कि विराट कोहली की जगह महेंद्र सिंह धोनी कप्तान की भूमिका में थे. वैसे अक्सर मैच के दौरान विराट कोहली को धोनी से सलाह लेते देखा जाता रहा है. लेकिन, इस मैच में धोनी ही गेंदबाजी आक्रमण से लेकर क्षेत्ररक्षण को व्यवस्थित कर रहे थे. इस दौरान धोनी ने दो प्रमुख स्पिन गेंदबाजों कुलदीप यादव और यजुवेंद्र चहल को समय-समय पर जरूरी सलाहें दी, जो मैच का रुख भारत की ओर करने में कारगर भी साबित हुईं. इन दोनों ने ही पांच विकेट झटककर ऑस्ट्रलियाई बल्लेबाजी की कमर तोड़ दी थी.

एनडीटीवी स्पोर्ट्स पर आई एक रिपोर्ट में धोनी द्वारा मैच के दौरान कई मौकों पर गेंदबाजों को दी गई सलाहों का जिक्र किया गया है. इसे जानने-समझने के बाद हर कोई यही कहेगा कि जो काम धोनी विकेट के पीछे से कर रहे हैं वह शायद अन्य विकेटकीपरों के लिए आसान नहीं है. ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है क्योंकि ऐसी सलाहों के पीछे महेंद्र सिंह धोनी का वह अनुभव भी है जिसने कप्तान रहते दुनियाभर में उन्हें प्रशंसा दिलवाई थी.

धोनी मैच के दौरान कुलदीप से एक जगह पर कहते हैं, ‘वो मारने वाला डाल न, अंदर या बाहर कहीं पर.’ इसके बाद एक जगह पर वे कहते हैं, ‘घुमाने वाला डाल-घुमाने वाला.’ कुलदीप के एक ओवर में ग्लेन मैक्सवेल द्वारा 20 से ज्यादा रन बनाए जाने के बाद अगले ओवर में धोनी एक जगह पर कुलदीप से कहते हैं, ‘न न मैंने बताया न, इसको इतना आगे मत डाल.’

धोनी एक जगह पर चहल से कड़े शब्दों में यह कहते हैं, ‘तू भी नहीं सुनता है क्या...ऐसे-ऐसे डाल, जैसा बताया था.’

इसी तरह मैच में एक जगह पर ये भी देखा जा सकता है कि धोनी कुलदीप यादव की फेंकी गई एक गेंद को देखने के बाद कुछ कदम चलकर, उन्हें कुछ सलाह देते हैं और अगली ही गेंद पर कुलदीप डेविड वॉर्नर का विकेट ले लेते हैं. नीचे दिए गए वीडियो में कुलदीप यादव खुद धोनी की इस सलाह के बारे में बता रहे हैं.

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