योग से कारोबार की दुनिया में उतरे बाबा रामदेव ने कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में कहा था कि अब वे अपने पतंजलि उत्पादों के ज़रिए केएफ़सी और मैकडॉनल्ड्स जैसे अंतरराष्ट्रीय फ़ास्ट फ़ूड ब्रांडों को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं. रामदेव शाकाहार के प्रबल समर्थक हैं और उन्हें यक़ीन है कि भारत के अलावा पूरे विश्व में शाकाहार के प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है. उन्होंने कहा था, ‘भारतीय शाकाहारी भोजन से अधिक स्वादिष्ट और स्वस्थ कुछ नहीं हो सकता.’ आगे उनका कहना था, ‘जब हम अपने व्यंजन लेकर आएंगे तो लोगों को चिकन और मटन खिला रहे इन सभी मल्टीनेशनल्स को हमसे मुकाबला करने में काफ़ी दिक़्क़त होगी।’

साफ़ है कि शाकाहार के प्रति बाबा रामदेव काफ़ी संवेदनशील और समर्पित हैं. लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों यह दावा किया जा रहा है कि दूसरों को शाकाहार के फ़ायदे बताने वाले रामदेव ख़ुद मांसाहारी व्यंजन में डाले जाने वाले विशेष मसाले बना रहे हैं. इस दावे पर मज़ाक़ के साथ-साथ गंभीर प्रतिक्रियाएं भी आ रही हैं.

अब सवाल उठता है कि क्या वाक़ई पतंजलि में मांसाहार व्यंजनों के लिए भी मसाले बनाए जा रहे हैं, और बनाए जा रहे हैं तो उसकी वेबसाइट और बाक़ी स्टोरों की लिस्ट में वे शामिल क्यों नहीं हैं.

गूगल पर पतंजलि की आधिकारिक वेबसाइट सर्च करने पर ‘चिकन मसाला’ या ‘मटन मसाला’ जैसा कोई प्रॉडक्ट नहीं दिखता. ऐमेज़ॉन और बिग बास्केट जैसे बड़े ऑनलाइन स्टोरों पर भी पतंजलि ब्रांड का कोई मांसाहारी व्यंजन मसाला नहीं मिलता.

तो फिर यह बात कहां से निकली कि रामदेव की पतंजलि चिकन/मटन मसाला बेच रही है? सत्याग्रह ने पतंजलि को एक मेल भेजकर यह जानने की कोशिश कि क्या कंपनी वास्तव में चिकन या मटन मसाला बना रही है. जवाब आया, ‘हमसे (पतंजलि) से जुड़ने में रुचि दिखाने के लिए आपका धन्यवाद. हमने जानकारी नोट कर ली है और आपको जल्द से जल्द सूचित करेंगे.’

पतंजलि का यह जवाब संतोषजनक नहीं था. सवाल उठता है कि अगर कंपनी चिकन मसाला नहीं बनाती तो इस दावे को ख़ारिज करने में भला उसे क्या दिक़्क़त हो सकती है. यह मेल 12 सितंबर को किया गया था. जवाब में कहा गया कि जल्द ही सूचित किया जाएगा. हालांकि यह एक ऑटो रिप्लाई भी हो सकता है जो हर मेल के सबसे पहले जवाब के रूप में भेज दिया जाता हो. लेकिन कई दिन बीत जाने के बाद भी कंपनी की तरफ से कोई दूसरा जवाब नहीं आया है.

इस बीच गूगल पर सर्च करने पर कुछ दिलचस्प जानकारियां मिलीं जो सोशल मीडिया के दावे की ओर इशारा करती हैं. यहां कीवर्ड ‘पतंजलि चिकन मसाला’ (अंग्रेज़ी में) से सर्च करने पर दो वेबसाइटों का पता चलता है. ये वेबसाइट हैं ‘पतंजलि फ़ूड्स डॉट कॉम’ और ‘पतंजलि फ़ूड्स ऑनलाइन डॉट कॉम’. इनमें से दूसरी वेबसाइट पर जाते ही होमपेज पर पतंजलि ब्रांड का नाम उसके डिज़ाइन के साथ देखा जा सकता है. लेकिन उसके ठीक नीचे लिखा है, ‘पतंजलि फ़ूड्स कनाडा’. यहां आपको सर्च ऑप्शन पर ‘चिकन मसाला’ टाइप करने पर पतंजलि चिकन मसाला मिल जाएगा, ‘असली स्वाद’ और ‘अच्छी गुणवत्ता’ के साथ.

लेकिन जांच-पड़ताल के दौरान दो दिलचस्प चीज़ें हुईं. सबसे पहले वेबसाइट से चिकन मसाला के पैकेट की तस्वीर हटा ली गई. उसके कुछ दिन बाद वेबसाइट से ‘चिकन मसाला’ ही हटा लिया गया. यह दिलचस्प है, क्योंकि यह वही उत्पाद और उसकी वही तस्वीर थी जो सोशल मीडिया पर वायरल हुई है.

गूगल सर्च करने पर तस्वीर अभी भी दिख रही है.
गूगल सर्च करने पर तस्वीर अभी भी दिख रही है.
अब चिकन मसाला ही हटा लिया गया है.
अब चिकन मसाला ही हटा लिया गया है.
बाक़ी उत्पादों तस्वीर समेत उपलब्ध हैं.
बाक़ी उत्पादों तस्वीर समेत उपलब्ध हैं.

यह वेबसाइट कनाडा में पतंजलि के उत्पादों को ऑनलाइन ऑर्डर करने के लिए बनाई गई है. कंपनियां अपने ब्रांड के नाम का एकस्व अधिकार (यानी पेटेंट) रखती हैं, ताकि कोई और उनके नाम का इस्तेमाल न कर सके. अगर यह वेबसाइट पंतजलि कंपनी की नहीं है, लेकिन उसके नाम पर पैसा कमा रही है तो रामदेव और पतंजलि को इस पर ऐक्शन लेना चाहिए. यह भी बताया जाना चाहिए कि अगर यह चिकन मसाला पतंजलि का नहीं है तो उसके पैकेट पर कंपनी का नाम क्यों छपा है, और बाक़ी मसाले और उत्पाद पतंजलि के हैं या नहीं.

सत्याग्रह ने पतंजलि को मेल करके यह जानने की भी कोशिश की कि क्या यह कनाडा के लिए उसकी आधिकारिक वेबसाइट है. उस मेल का भी कोई जवाब अभी तक नहीं आया है. हालांकि कुछ वेबसाइटों का कहना है कि पतंजलि के प्रवक्ता ने पतंजलि के चिकन मसाला बेचने से इनकार किया है. साथ ही क़ानूनी कार्रवाई करने को लेकर विचार करने की बात भी कही है.

पतंजलि का दावा है कि उसके उत्पाद दुनिया के दस देशों में उपलब्ध हैं. इनमें कनाडा भी शामिल है. आप नीचे स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं. कनाडा के ब्रैम्प्टन शहर में पतंजलि का सेवा केंद्र भी है, ‘पतंजलि सेवा केंद्र ब्रैम्प्टन’ नाम से. यहां पतंजलि अपने स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद बेचती है. लेकिन वेबसाइट के बारे में पढ़ने पर पता चलता है कि यहां और भी उत्पाद बेचे जाते हैं. यहां लिखा है, ‘हम ब्रैम्प्टन में पतंजलि के उत्पाद देते हैं जो स्वास्थ्य के लिए सर्वोत्तम हैं. यहां हमारी दो और लोकेशन हैं जो जड़ी-बूटी और रोज़मर्रा की ज़रूरतों से संबंधित उत्पाद दे रही हैं. कनाडा में हमारे अधिकृत रिटेल स्टोर भी हैं.’ अब ‘रोज़मर्रा की ज़रूरतों’ में तो खाना पकाने के मसाले भी आते हैं.

इन बातों को जानने के बाद सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रही जानकारी किसी अफ़वाह से ज़्यादा लगती है. जानकारों के मुताबिक अगर यह ग़लत है तो पतंजलि को स्पष्टीकरण देना चाहिए और अगर यह सही है तो राजमा और छोले मसाला की तरह ‘चिकन मसाला’ भी भारत में बेचने में पतंजलि और बाबा रामदेव को क्या दिक़्क़त है? सवाल यह भी है कि अगर पतंजलि का इस वेबसाइट से कोई संबंध नहीं है तो कुछ दिन पहले ‘चिकन मसाला’ के पैकेट की जो तस्वीर वेबसाइट पर थी, वह उत्पाद समेत ही कैसे हटा ली गई. बाक़ी उत्पाद अभी भी पतंजलि के नाम से बेचे जा रहे हैं. उन्हें क्यों नहीं हटाया गया?

कनाडा का उपभोक्ता बाज़ार भारत से बड़ा तो नहीं है. माना कि बाबा रामदेव ‘शाकाहार प्रेमी’ हैं, लेकिन देश का बड़ा तबक़ा ‘मांसाहार प्रेमी’ है. इसमें कई लाख तो उनके अपने समर्थक ही होंगे. अगर उनकी कंपनी वास्तव में यह चिकन मसाला बना रही है तो ये समर्थक इससे क्यों वंचित रहें?