राजनीति में कई ऐसी घटनाएं घटती हैं जिनका असर बहुत व्यापक और दूरगामी होता है. 2016 में सत्याग्रह ने पहली बार महामुख्यमंत्री का चुनाव किया था. उस वक्त 2014 के चुनाव में हुई भारतीय जनता पार्टी की जीत ऐसी ही एक घटना लग रही थी. इसका असर कई स्तर पर न सिर्फ दूसरे दलों पर बल्कि भाजपा के अंदर के बदले हुए समीकरणों में भी दिख रहा था. 2014 की छाप तो स्पष्ट तौर पर अब भी देश पर दिख रही है लेकिन इस साल की एक राजनीतिक घटना अब उससे कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है.

कायदे से तो योगी आदित्यनाथ का देश के सबसे बड़े राज्य का मुख्यमंत्री बनना वह घटना होनी चाहिए थी. लेकिन योगी के अब तक के औसत काम और इससे बड़ी घटी एक राजनीतिक घटना ने इसे छोटा बना दिया. इस साल जिस घटना का सबसे अधिक असर देश की सियासत पर दिख रहा है वह है जनता दल यूनाइटेड के प्रमुख नीतीश कुमार का भाजपा के पाले में आ जाना. नरेंद्र मोदी का मुकाबला करने के लिए न सिर्फ विपक्षी दलों बल्कि देश के बौद्धिक वर्ग में भी यह बात चल रही थी कि 2019 की लड़ाई के लिए नीतीश कुमार के अलावा फिलहाल कोई और सहारा नहीं है. ऐसे में नीतीश कुमार का विपक्ष को छोड़ कर धुर विरोधी नरेंद्र मोदी के खेमे में चले जाना कई सियासी समीकरणों को उलटने-पलटने की वजह बन गया.

इसका असर यह हुआ कि पिछली बार की सूची में जहां गैर कांग्रेसी और गैर भाजपा मुख्यमंत्रियों का दबदबा था, वहीं इस बार ऐसे मुख्यमत्रियों की स्थिति कमजोर हुई है. पिछली बार सत्याग्रह की चोटी के दस मुख्यमंत्रियों की सूची में आठ क्षेत्रीय दलों के थे. लेकिन जब नीतीश के हटने से पूरा विपक्ष कमजोर होते दिख रहा है तो जाहिर है कि ऐसे मुख्यमंत्रियों को भी कमजोर तो होना ही था.

तो फिर अभी देश का सबसे ताकतवर मुख्यमंत्री कौन है? कौन है जिसे हम इस साल महामुख्यमंत्री कह सकते हैं? सत्याग्रह ने पिछले साल की तरह ही अपने स्तर पर इस सवाल का जवाब तलाशने की कोशिश की. सत्याग्रह की संपादकीय टीम ने कुछ पैमाने तय किए. पिछले साल भी यही पैमाने अपनाए गए थे. इन्हें तय करते वक्त यह ध्यान रखा गया कि न सिर्फ अपने प्रदेश में मुख्यमंत्री का काम दिखे बल्कि वहां उसकी सियासी हैसियत भी आंकी जा सके. इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखा गया कि सूबे के बाहर किसी मुख्यमंत्री की क्या हैसियत है और उसके आधार पर वह राष्ट्रीय राजनीति पर कितना असर डाल सकता है. इस बात को भी समझने की कोशिश की गई कि किसी मुख्यमंत्री में प्रधानमंत्री बनने की कितनी संभावना है.

महामुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया में सत्याग्रह की संपादकीय टीम ने छह पैमाने तय किए - विकास, गवर्नेंस, पार्टी में स्थिति, राज्य के बाहर प्रभाव, गठबंधन राजनीति में स्वीकार्यता और प्रधानमंत्री बनने की कितनी संभावना. इन छह पैमानों पर देश के अलग-अलग राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आंकने की कोशिश की गई.

कई सरकारी रिपोर्टों, जमीनी राजनीतिक हालत और राजनीतिक जानकारों की राय के आधार पर सत्याग्रह ने जब इन मुख्यमंत्रियों की स्थिति को इन छह पैमानों पर समझने की कोशिश की तो कई आश्चर्यजनक तथ्य सामने आए.

भाजपा के शिवराज सिंह चौहान, रमन सिंह और मनोहर पर्रिकर जैसे मुख्यमंत्रियों का प्रदर्शन विकास और गवर्नेंस के पैमाने पर तो अच्छा दिखा. लेकिन पार्टी की आंतरिक राजनीति में इनकी स्थिति उतनी मजबूत नहीं नजर आई. वहीं इसी साल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने भाजपा के योगी आदित्यनाथ पार्टी में स्थिति और राज्य से बाहर प्रभाव के मामले में तो पार्टी के दूसरे मुख्यमंत्रियों के मुकाबले सबसे मजबूत दिखे लेकिन विकास, गवर्नेंस और गठबंधन राजनीति में स्वीकार्यता के पैमाने पर उनका प्रदर्शन ठीक नहीं रहा.

छठे पैमाने यानी प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर सबसे अधिक अंक देश के सभी मुख्यमंत्रियों में से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मिले. इसकी सबसे बड़ी वजह नीतीश कुमार का भाजपा के पाले में चला जाना है. अगर नीतीश अभी भी विपक्ष का नेतृत्व कर रहे होते तो भले ही उन्हें अंतिम कामयाबी नहीं मिलती लेकिन संभावनाओं के खेल में जरूर वे आगे रहते. यही वह पृष्ठभूमि है जो ममता बनर्जी को बाकी मुख्यमंत्रियों के मुकाबले सबसे आगे खड़ा कर देती है.

सबसे आश्चर्यजनक बात इस बार यह उभरकर आई कि नीतीश कुमार मजबूत अब भी लगभग उतने ही बने हुए हैं. दरअसल, पलटी मारने के बावजूद आज भी वे इस स्थिति में हैं कि अगर वे फिर से पलटी मार दें तो पूरा विपक्ष तुरंत ही उनका भाजपा के साथ जाने का ‘पाप’ भूल सकता है. कुल मिलाकर विकल्पहीनता की जो स्थिति है, उससे नीतीश कुमार का कद अभी भी बाकियों के मुकाबले बड़ा दिखता है.

विकास और गवर्नेंस के पैमाने पर आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू सबसे आगे दिखते हैं लेकिन दूसरे पैमानों पर उनकी क्षमता सीमित हो जाती है. पिछली बार की सूची में जयललिता थीं. अगर वे अब भी जीवित होतीं तो नीतीश कुमार के भाजपा के साथ जाने के बाद की स्थिति में और मजबूत दिखतीं.

पिछली बार सत्याग्रह के शीर्ष 10 मुख्यमंत्रियों की सूची में कांग्रेस का कोई भी मुख्यमंत्री नहीं था. लेकिन इसी साल मार्च में पंजाब के मुख्यमंत्री बने कैप्टन अमरिंदर सिंह इस बार चोटी के दस मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं. पिछले साल केंद्र में रक्षा मंत्री के तौर पर काम कर रहे मनोहर पर्रिकर भी शीर्ष दस में हैं. पिछले साल दूसरे नंबर पर रहे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इस साल जैसे-तैसे शीर्ष दस में बने रह सके हैं. वाम दलों की स्थिति खराब होने के बावजूद केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन चोटी के दस मुख्यमंत्रियों में शामिल हैं.

आइये जानते हैं कि साल 2017 में देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी 10 मुख्यमंत्री कौन से हैं. और इनमें से कौन, किस स्थान पर है!

#1 कई अगर-मगर के बाद भी नीतीश कुमार ही इस बार के भी महामुख्यमंत्री हैं

#2 विकास और गवर्नेंस के पैमाने पर चंद्रबाबू नायडू बाकी मुख्यमंत्रियों से मीलों आगे हैं

#3 ममता बनर्जी मोदी लहर का सफलतापूर्वक मुकाबला करने वाले गिने-चुने लोगों में से हैं

#4 शिवराज सिंह चौहान पिछले साल से बस जरा से ही नीचे खिसके हैं

#5 आज की कांग्रेस में अमरिंदर सिंह से अधिक ताकतवर कोई और मुख्यमंत्री नहीं है

#6-10 इनमें से एक मुख्यमंत्री को शीर्ष तीन में होना चाहिए था और एक पिछली बार शीर्ष दो में था

महामुख्यमंत्री-2016 : देश के सबसे ताकतवर और प्रभावी 10 मुख्यमंत्री